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________________ मुरादेव श्रावक । | वांच्या नावां बाहार | जो | ॐ | सीलबनादि | नहीं लागई || तो सुरादेवासमणो वासया । चपचिपचियाति तुमंसी लाई जावन संज | तोते । ॐ । जता दरो वडो पुत्र ताहराघर घी लेइनई | जुऊ ग्रागलिमारीवई ) ) पांच मांस सितो ते यद्यतेपुत्त्रं सानो गिदाउलीले मि तव तो घार मिशपंचमं नासुला करीनइं२|| तेनसुंतरीस) | लोहनी कड हातेमां दें। तनी सपबई | नारुं शरीर मांसें ससोलए करेमि चादारांत रियंसि कडादयंसि देमि तवायंमंसेए करी | लोहाईकरीषरडीस) |जिम || जं| चार्त्यमानपोहोतोधको कालें मरीस जीवक्की यसोशिएएए यया सिंचामि कदा डमं ग्रह दह व सहे काले चेचजीविया रहीतवाइस) | ईमविचिष्टपुत्रनई (लक पुत्र नई || केक ना पांच मांस नासु लाक | तिमजकरीस नई सर्ववत्। दिवसेविद्यमि एवंमशिमयं कणीयसं एक्वेक्वे पंचमंस सोलया। तदेव करे मारी
SR No.650006
Book TitleUpasakadasanga Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
AuthorSomji Rishi
PublisherSurat
Publication Year1783
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_upasakdasha
File Size29 MB
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