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________________ BUCURESTISSERIES | मझे वसित्ता, चउपन्नं राइंदियाइं छउमत्थ-परिआयं पाउणित्ता, देसूणाई सत्त वाससयाइं केवलिपरिआयं पाउणित्ता, पडिपुण्णाई सत्त वाससयाइं सामण्ण-परिआयं पाउणित्ता, एगं वासस-12 | हस्सं सव्वाउअं पालइत्ता, खीणे वेयणिज्जाउय-नाम-गुत्ते इमीसे ओसप्पिणीए दूसम-सुस| माए समाए बहुविइक्वंताए जे से गिम्हाणं चउत्थे मासे अट्ठमे पक्खे आसाढसुद्धे, तस्स णं | आसाढसुद्धस्स अट्टमीपक्खे णं उप्पिं उज्जित-सेलसिहरंसि पंचहिं छत्तीसेहिं अणगारसएहिं | | सद्धिं मासिएणं भत्तेणं अपाणएणं चित्तानक्खत्तेणं जोगमुवागएणं पुव्वरत्तावरत्त-कालसमयंसि | नेसज्जिए कालगए (ग्रंथाग्रं ८०० ) जाव सव्व-दुक्ख-प्पहीणे ॥सू . १८३॥ अरहओ णं अरिद्वनेमिस्स कालगयस्स जाव सव्वदुक्खप्पहीणस्स चउरासीइं वाससहस्साई विइक्वंताई, पंचासीइमस्स वाससहस्सस्स नव वाससयाई विइक्ताई, दसमस्स य वास-18 | सयस्स अयं असीइमे संवच्छरे काले गच्छइ ॥ सू. १८४॥ २२॥ इति श्रीनेमिनाथ-चरित्रम् ॥
SR No.600323
Book TitleKalpsutram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBhadrabahuswami
PublisherBarsasutra PRakashan Samiti
Publication Year1980
Total Pages206
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_kalpsutra
File Size15 MB
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