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________________ औ० १९/ चं०/२४ रा० २० जी० २१ प्रज्ञा०२२ प्रकी०२७ जीहाए विलिहतो जुअलसिलासंथारे जुत्तस्स उत्तमढे जुत्तस्स० सुक्ख संथा० जुत्ते पमाणरइओ जे अणहिअपरमत्था जे अ न अकित्तिजणए , उत्तरेण इंदा , कडुयदुमुप्पन्ना ,, कुम्मसंखताडण ,, केइ नालियावद्धा जेण विरागो जायइ |, बि रागो ,, २७-७२६ जे पयणुभत्तपाणा २७-१६८० ., पुण अट्ठमईया २७-६३० ,,, गुरुपडिणीया ,,,, तिगारवजढा २७-२५८४ ,, ,, वट्टविमाणा २७-७५२ ,,, सुयसंपन्ना २७-७६४ ., पोग्गला अणिट्ठा | ,, मे जाणंति जिणा २७-१८९१ २७-१२६० २२-८७ | जोअणमद्धं तत्तो २७-२३९ जोअणसहस्समेगं २७-१५३१ जो अस्थिकायधम्म २७--१७१८ | जो अ बिमाणुस्सेहो २७-५७६ | जो आरंभे वट्टा २७-२०९६ : जोइसस्स य दाराई २७-९५७ | जोइसियाणं० देवाणं २७-१३६५ जोइसियाणं पुच्छा देवाणं २२-२०१सू० २७-९९ | जो उ प्पमायदोसेणं ૨૪૪૮ २७-२०५ | जोपसु किलामंति २७-१२७३ २७-१२८७ | जो कुंवगावराहे २७-१६६१ २७-१९४४ जोगा देवय तारग्ग २५--१०० २७-१२९१ | जो गारवेण मत्तो २१-१६ | जोगो देवय तारग्ग २५-१२० २७-१५३ जोग्गं पायच्छित्त २७-१३६१ २७-१३५५ | जो जत्तो वा जाओ २७-८२७ २७-२४५७ जो जस्सा विकुखभो २७-१०१९ २७-२०१८ | जो जि.ण ? भावे २२-१२२ २७-९६० | जो जोगओ अपरिणा० २७-१३४३ २२-१३१ | जोणिसयसहस्सेसु २७-१८२७ २७-११२६ | जोणीमुहनिग्गच्छंतेण २७-१६२१ २७-१३२६ जोणीमुहनिप्फिडिओ २७--५३३ २४-१५ | जोतिसियाणं देवाणं २२-२३६स० | जो तिहिं पए हिं धम्म २७-१६६२ जेणंतरेण निमिसंति जे दंसणवावन्ना जे दाहिणाण इंदा ॥३३॥
SR No.600310
Book TitleUpang Prakirnak Sutra Vishaykram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSagaranandsuri, Anandsagarsuri
PublisherJain Pustak Pracharak Samstha
Publication Year1948
Total Pages182
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_index
File Size16 MB
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