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कल्प० ॥ २७ ॥
वओ महावीरस्स अम्मापियरो पढमे दिवसे ठिइवडियं करिंति, तइए दिवसे चंदसुरदंसणिअं करिंति, छट्ठे दिवसे धम्मजागरियं करिंति, इक्कारसमे दिवसे विइक्कंते निवत्तिए असुइजम्मकम्मकरणे, संपत्ते बारसाहे दिवसे, विउलं असणपाणखाइमसाइमं उवक्खडाविंति, उवक्खडावित्ता मित्तनाइनिययसयणसंबंधिपरिजणं नाए य खत्तिए अ आमंतित्ता तओ पच्छा पहाया कयबलिकम्मा कयकोउयमंगलपायच्छित्ता सुद्धप्पावेसाई मंगल्लाई पवराई वत्थाई परिहिया अप्पमहग्घाभरणालंकियसरीरा भोअणवेलाए भोअणमंडवंसि सुहासणवरगया तेणं मित्तनाइनिययसंबंधिपरिजणेणं नायएहिं खत्तिएहिं सद्धिं तं | विउलं असणपाणखाइमसाइमं आसाएमाणा विसाएमाणा परिभाषमाणा परिभुंजेमाणा | एवं वा विहरंति ॥ १०२ ॥ जिमिअत्तुत्तरा गयाविअ णं समाणा आयंता चुक्खा परम
१ जागरिंति (क० कि० क०सु० )
बारसो
॥ २७ ॥