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________________ * २७४१ पण्णत्ति ( भगवतीः) मूत्र Nigita Amwwwwwwwwwwwnnnnnnnnnnni ...जीवपदेसे षडुच्च ओघादेसेणवि विहाणादेसेणवि कडजुम्मा, णो तेओगा णो दावर जम्मा, णो कलिओगः ॥ सरीरपदेसं पडुच्च ओघादेसेणं सिय कडजम्मा जाव सिय कलिओगा ॥ विहाणादेसेणं कडजुम्मावि जाव कलिओगावि ॥ एवं णेरइयावि ॥ एवं जाव वेमाणिया ॥ सिद्धाणं भंते ! पुच्छा, गोयमा ! ओघादसेणवि विहाणादेसेणवि कडजुम्मा णो तेओगा णो दावरजुम्मा णो कलिओगा ॥ ९॥ जीवेणं भंते ! किं कडजुम्मपदेसोगाढे पुच्छा ? गोयमा। सिय कडजुम्म १देसोगाढे जाव सिय कलिओगपदेसोगाढे ॥ एवं जाव सिद्धे ॥ जीवाणं भंते ! किं कडजुम्म पदेसोगाढा द्वापर त्रेता व कलि युग्म नहीं हैं. शरीर प्रदेश आश्री सामान्य से स्यात् कृतयुग्म यावत् स्यात् कलियुग्म है ॥ ९ ॥ विधानादेश से कृतयुग्म यावत् कलि युग्म है. ऐसे ही नारकी यावत् वैमानिक पर्यंत जानना. सिद्ध की पृच्छा, अहो गौतम ! सामान्य व भेद से कृतयुग्म है परंतु त्रेता, द्वापर व कलि युग्म नहीं हैं. अहो भगवन् ! जीव क्या कृतयुग्म प्रदेशावगाहा है ? अहो गौतम ! स्यात् कृतयुग्म प्रदेशावगाही स्यात् कलि युग्म प्रदेशावगाही ऐसे ही सिद्ध पर्यंत कहना. अहो भगवन् ! बहुत जीव क्या कृतयुग्म प्रदेशावगाही पृच्छा, अहो गौतम - सामान्य से कृतयुग्म प्रदेशावगाही परंतु त्रेता, द्वापर व कलि युग्म वाथे पचीसमा शतक का चौथा उद्देशा शा । । ।
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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