________________
विविध पूजन संग्रह
॥ ११० ॥
Jain Education International
अधिष्ठायक देव - देवी पूजन:
मण्डल के आठ देरीओ (मंदिर) में श्रीफल १। रूपीया व नैवेद्य यंत्र पर पक्षाल पूजादि करना ।
(१) सरस्वती पूजन ( प्रथम देरी )
कुन्दिन्दुगोक्खीर, तुसारवन्ना । सरोज हत्था कमले निषण्णा ।
वाएसिरि पुत्थय वग्ग हत्था । सुहाय सा अम्ह सया पसत्था ।
ॐ ह्रीँ क्लीँ ब्लीं श्रीं ह्स्कल ह्रीं ऐं श्रीगुरुगौतमस्वामी पूजने श्रुतज्ञान अधिष्ठायिका सरस्वत्यै इदं अर्ध्यं पाद्यं गन्धं पुष्पं धूपं दीपं चरु फलं स्वस्तिकं यज्ञभागं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतामिति स्वाहा ।
(२) महालक्ष्मीपूजन ( द्वितीय देरी )
यत्कृपालेशमात्रेण, निर्धनो धनदो भवेत्, श्री जिनार्चनामतां सौम्यां, लक्ष्मीदेवीं भजाम्यहम् । ॐ ह्रीँ क्लीँ ब्लीँ श्रीं ह्स्कल ह्रीं ऐं श्रीगुरुगौतमस्वामिपूजने पद्मद्रहनिवासिनी
For Personal & Private Use Only
श्री गौतमस्वामी पूजनविधि
॥ ११० ॥
www.jainelibrary.org