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________________ विविध पूजन संग्रह ॥ १०८ ॥ स दक्षिणं भोजनमेवदेयं, साधर्मिकं संघ सपर्ययेति । कैवल्यवस्त्रं प्रददौ मुनीनां, स गौतमो यच्छतु वांछितं मे ॥ ७॥ शिवं गते भर्तरि वीरनाथे, युगप्रधानत्वमिहैव मत्वा । पट्टाभिषेको विदधे सुरेन्द्रैः, स गौतमो यच्छतु वांछितं मे ॥ ८॥ त्रैलोक्यबीजं परमेष्ठिबीजं, सद्ध्यानबीजं जिनराजबीजम् । यन्नाममंत्रं विदधाति सिद्धिं, स गौतमो यच्छतु वांछितं मे ॥ ९॥ श्री गौतमस्याष्टकमादरेण, प्रबोधकाले मुनिपुङ्गवाये य । पठन्ति ते सूरिपदं सदैवा, नन्दं लभन्ते सुतरांक्रमेण ॥ १०॥ सर्वारिष्टप्रणाशाय, सर्वाभिष्टार्थदायिने । सर्वलब्धिनिधानाय गौतमस्वामिने नमः ॥ अंगूठे अमृत वसे, लब्धि तणा भण्डार । श्री गुरु गौतम समरीए वांछित फल दातार । अक्षीणमहानसी लब्धि, केवल श्री करां भुजे । प्रगे लक्ष्मीर्मुखे वाणी, तमहं गौतमं स्तुवे । गौतम प्रणम्या पातकटले, उत्तम नरनी संगत मले।गौतम नामे निर्मलज्ञान, गौतम नामे वाधे वान। श्री गौतमस्वामी पूजनविधि ॥१०८॥ in Educatio n For Personal & Private Use Only
SR No.600250
Book TitleVividh Pujan Sangraha
Original Sutra AuthorChampaklal C Shah, Viral C Shah
Author
PublisherAnshiben Fatehchandji Surana Parivar
Publication Year2009
Total Pages266
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size21 MB
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