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॥ श्रीजिनाय नमः ॥
॥ साधु-साध्वी पर्यंत आराधना विधिः ॥
बीमार साधु-साध्वी को या 'योगशास्त्र' के पंचम प्रकाशमें बतलाये हुए काल-ज्ञानके बाह्य-अभ्यंतर लक्षणों से अपना मरण नजदीक मालूम हो उनको अंतिम आराधना करनी चाहिये. उसकी विधि बतलाते ह:-शुभ दिन मुहूर्त देखकर पहले पूजन किये हुए जिनविंबके दर्शन करावें, बादमें बीमार तथा चतुर्विध संघ सहित गुरु इरियावहि पडिक्कमें, फिर खमा० देकर 'इच्छा० संदि० भग०! चैत्यवंदन करूं ?' 'इच्छं' कहकर चैत्यवंदन करके चार थुइसे देववंदन कर, आगे लिखे मुजब ६ काउस्सग्ग करें और पार कर नमोऽर्हत्० कहकर ६ थुइयां कहें
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