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________________ यशोधर ॥ ॥ EEEEPEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEFEEEEEEEEEEEEEEEEEEE इत्याक्रोशगिरः किरत्सु परितः पौरेषु रोषोदया-त्रीतं तैरविमृश्य शिष्ययुगलं राज्ञः पुरः पौ-चरित्रं रुपैः ॥ संजाताश्च दिशो दशापि सहसा विवायरूपाः परं । नीलीकऊलसांश्कईमनरैर्गाढं | विलिप्ता इव ॥ ७ ॥ ॥ इति श्रीमाणिक्यसूरिविरचिते श्रीयशोधरचरित्रे प्रथमः सगेः समाप्तः ॥ ॥हितीयः सर्गः प्रारभ्यते ॥ निपेतुस्तस्य नून -स्तयोरुपरि दृष्टयः॥ करुणाकौतुकस्तंन-त्रपातंकतरंगिताः ॥१॥ चुक्षुभुः सकलाः कौला । योगिन्यो मुमुहुर्मुहुः ॥ मंत्रिणस्त्रणसंकाशं । मेनिरे निजजीवितं ॥ २॥ चिंतयामास नूपालः । स एवं निजचेतसि ॥ अहो बत महाश्चर्य । कुतो मिथुनमी. दृशं ॥ ३ ॥ अदृष्टपूर्वमस्माक-माकस्मिकमिहागतं ॥ दिव्यरूपमिदं युग्मं । न सामान्य विनाति मे ॥ ४॥ शांतकांतिमयी मूर्ति-र्वयः सौन्नाग्यसुंदरं ॥ अनयोर्दर्शने जाते । निर्दयत्वं ॥ ए॥ गतं मम ॥ ५ ॥ ललितौ बालको वीक्ष्य । कीरकंगविमावुनौ ॥ प्रचंदंडहस्तः स्या-छिहस्तो स यमोऽपि हि ॥ ६ ॥ अयं सर्गगुणाधारः । कुमारस्तारलोचनः ॥ स्कंदसब्रह्मचारीव ।। VEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEE Jan Education Internaton For Personal & Private Use Only www.janelibrary.org
SR No.600192
Book TitleYashodhar Charitra
Original Sutra AuthorManikyasuri
Author
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1910
Total Pages130
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size9 MB
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