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लघुणिंदे,ण निम्मिया अप्प पढणहा ॥३४३॥ संखित्तयरी उश्मा, सरीरमोगोदणा प्रकरण.
य संघयणा ॥ सन्ना संगण कसा, य लेसिदिय उसमुग्घाया ॥ ३४४॥ दिछी ।। ३४॥
दसण नाणे, जोगु वउँगो ववाय चवण विज्ञापऊत्ति किमादारे,सन्निगईरागई। वेए॥३४यातिरिया मणुया काया,तह गाबीया चनक्कगा चनरो ॥ देवा नेरश्या । वा, अहारस नावरासी ॥३४६॥ एगा कोडी सत सपि, लरका सतहुत्तरी स हस्साय ॥दोय सया सोलदिया, आवलियाणं मुहुत्तंमि ॥३४॥ पणसहि स.
दस पणसय, बत्तीसा ग मुहुत्त खुड्डनवा ॥ दोय सया उप्परमा, आवलिया । जाएग खुड्डनवे ॥३४॥ मलदारि हेमसूरि,ण सीसलेसेण विरश्यं सम्मं ॥ संघ ॥३४॥
यणि रयण मेयं, नंदन जा वीरजिण तिवं ॥३४॥ इतिश्रीत्रैलोक्यदीपिकाना
मसंग्रहणीसंपूर्णा ॥ ॥७॥ ॥ ॥ ॥ ॥ Nu श्रीजिनायनमः ॥ अथ श्रीरत्नशेखर सूरिकृत लघुक्षेत्रसमास प्रकरणं
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