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________________ प्रकरण. जीववि० घण तणु वायाश्या, नेया खलु वानकायस्स ॥७॥ सादारण पत्तेया, वण सजीवा ज्दा सुए नणिया॥ जेसिमणंताणं तणु, एगा सादारणा तेक॥Gulal ॥१ ॥ ॥ कंदा अंकुर किसलय, पणगा सेवाल नमि फोमा य॥ अल्लयतिय गजर मो, ब वबुला थेग पल्लंका ॥ए॥ कोमलफलं च सवं, गूढसिराइं सिणाश्पत्ता ॥ थोहरि कुआरि गुग्गुलि, गलोइपमुहा य बिन्नरुदा ॥ १० ॥ श्चाश्णो | अणेगे, दवंति नेया अणंतकायाणं । तेसि परिजाणण, लकणमेयं सुए | नणियं ॥११॥ गूढसिरसंधिपत्वं, समन्नंगमदीरुगं च बिन्नरुदं ॥ साहारणं । सरीरं, तविवरीयं च पत्तेयं ॥१२॥ एगसरीरे एगो, जीवो जेसिं तु तेय पत्ते ॥ || या ॥ फल फूल लि कहा, मूला पत्ताणि बीयाणि ॥ १३ ॥ पत्तेयं तरुमुत्तं, पंचवि पुढवाश्णो सयललोए ॥ सुहुमा दवंति नियमा, अंतमुहुत्तान अहि ॥ १॥ स्सा ॥२४॥ संख कवड्डय गंमुल, जलो य चंदणग अलस सदगाई। मेद Jain Educationa l For Personal and Private Use Only |RAMainelibrary.org
SR No.600176
Book TitleLaghu Prakaran Sangraha
Original Sutra AuthorShravak Bhimsinh Manek
Author
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year
Total Pages222
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size19 MB
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