SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 48
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ बृहत्सं ॥ २२ ॥ इमाईसु ॥ जं तेसिं नववार्ज, पलिया संखंस प्रासु ॥ १५१ ॥ बालतवे पबिधा, उक्कड रोसा तवेण गारविया ॥ वेरेय पडिबा, मरिनं सुरेस जायंति ॥ १५२ ॥ | रजगाद विस नरकण, जल जल पवेस तरह बुद दर्ज || गिरिसिर पडणा न मुया, सुदद्भावा हुंति वंतरिया ॥ १५३ ॥ तावस जा जोइसिया, चरग परिवा य बंजलोगो जा ॥ जा सहसारो पंचिं, दितिरिच्य जा अच्चु सड्ढा ॥ १५४ ॥ इ लिंग मिच्छदिधि, गेविका जाव जंति नक्कोसं ॥ पयमवि सदहंतो, सुत्तचं मिच्च दिट्ठी ॥ १५५॥ सुतं गणदररइयं तदेव पत्तेयबु-दरइयं च ॥ सुयकेवलि या रश्यं, अनिल दस पुत्रिणा रइयं ॥ १५६ ॥ बनमच संजयाणं, नववा नक्को सर्जा सबठे ॥ तेसिं सङ्काणं पित्र्य, जदम होइ सोहम्मे ॥ १५७ ॥ संतंमि चन्दपुविस, तावसाईण वंतरेसु तदा ॥ एसि नववाय विदी, नियकिरियविया | सोवि ॥ १५८ ॥ वरिसदनारायं, पढमं बीयं च रिसदनारायं ॥ नारायम Jain Educationonal For Personal and Private Use Only प्रकरण. ॥ १२ ॥ w.jainelibrary.org
SR No.600176
Book TitleLaghu Prakaran Sangraha
Original Sutra AuthorShravak Bhimsinh Manek
Author
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year
Total Pages222
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size19 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy