________________
श्रीमन्महाभारतम् : : श्लोकानुक्रमणी
६५९ विस्था रथिनश्चान्ये (भीष्म) ५५.२४ विराजन्ते विमानम्था(शांति)२८४.११ विराटः प्रादिशद्यानि (विरा) ३१.२७ विराटस्य रथानीक (द्रोण) १०.७१ विरूप किं धारयते (शांति) १६६.६० विरथा रथिनाश्चत्र (भीष्म) ७०.२७ विराटद्ध पदाभ्यां च (उद्योग) १५३.२ विराटभवने यश्च क्लेशो(कर्ण) ८३.४७ विराटस्य सभां गत्वा (विरा) ७०.३ बिरूपरूपः पिङ्गाक्षः (आ) १५२.५ विरथावसियुद्धाय (कर्ण) १३.२६ विराटद्र पदो चेमा (भाम) ५०.२८ विराटमन्वयातूणधृष्ट (सभा) ४५.४७ विराटस्य मुतां पूर्व (सौप्तिक) १६.२ विरूपाक्ष दशभुज (आश्च) 5.३० विरथावसियदाय (द्रोण) १४२.३३ विराट द्रुपदी चैव (आथम) ३२.८ विराटमन्वयुः पार्थाः (विरा) ३१.३० विराटस्य मूतो ज्येष्ठो(विरा) ३१.१६ विरूपाक्षण सुग्रीव (वन) २८५६ विरथावसियुद्धाप (भीष्म) ४५.५४ विराटद्रुपदौ चोभी (उद्योग) १६०.७३ विराटः सह पुत्रण (भीष्म) ४७.३० विराटं दु पदं चैव (उद्योग) १६६.३ बिस्पो यावदादर्श मात्मन(आ)७४.८७ विरथो भरतश्रेष्ठ (कर्ण) ५१.४३ विराटपदी चाभी (भीम) ११९.२१ विराट दतमायान्त (द्राण) १६५.१४ विराट निहतं दष्टवा (स्त्री) २०.३१ विरूपो रूपवांश्चैव (अन) ४०.३२ विरथो भीमसेनेन कृतो(द्रोण) १४८.१६ विराटद्र पदी चैव (उद्योग) १५३.१२ विराटं सहसेनं तु द्रोण (द्रोण) १६७.२३ विराट वितुदन्त्येते गध्र(स्त्री) २०.३२ विरेजतुर्महाराज किशुका (कर्ण)२६.१८ विरथो भीमसेनोवै (द्रोण) १४८.२ विराटद्र पदी चोभी (उद्योग)१९४.१६ विराटराज रमयन् (विरा) १.२६ विराट सैन्धवो राजा(भीष्म) ११६.४२ विरेजुः पादपास्तत्र विचित्र(आ) ७०.११ विरथो रथिना श्रेष्ठो (द्रोण)१३४.१५ बिराटर पदौ वृद्धाव(उद्योग)१६३.४१ विराटवाक्येन च तेन (विरा) ८.६ विराटेनोनरा दत्ता (आ) २.२१४ विरेमतुस्तु तद्वाक्य (शांति) १६७.२८ विरथो वध्यमानस्तु (भीष्म) ६६.३६ विराटद्रुपदौ वृद्धौ कुन्ति(भीष्म)११०.५ विराटश्च ततः पश्चाद् (भीष्म) १६.१६ विराटेन तु मत्स्येन (सभा) ५२.२६ विरोचन सुधन्वाऽयं (उद्योग) ३५.३६ विरथो विधनुष्काच (द्रोण) १७१.२३ विराटद्र पदी वृद्धी (भीष्म) ११०.१६ विराटश्च महाराज (द्रोण) १६.५ विराटोऽथ त्रिभिर्बाण (भीष्म) ७३.१ विरोचनस्य पुत्रोभूदबलि (आ) ६५.२० विरम विरम कर्ण (कर्ण) ३७.३३ विराटद पदौ वृद्धौ (भीष्म) १११.२२ विराटश्च महाराज (भीष्म) ११६.४३ विराटो दशभिर्भल्ल रा(भीष्म) १११.२४ बिरोचनोऽथ दैतेयस्तदा(उद्योग) ३५.७ विरमेच्छुकवरेभ्यः (शाति) १०३.१० विराटपदौ षभिः(द्रोण) १५३.२३ विराटश्च शिखण्डी (उद्योग) १२६.८ विराटो द्र पदश्चव (द्रोण) ११४.६४ विरोचमानं विविधैः (आ) २०७.३६ विरराज भृशं चित्रा (द्रोण) १४६.३१ विराटनगरं रम्यं गच्छमानो(विरा)६.१ विराटः सह पुत्राभ्यां (उद्योग) ५७.६ विराटो द्रुपदश्चैव (भीष्म) ८६.१७ विरोचेता महारङ्ग (कर्ण) १३.३० विरराम महातेजास्त (वन) १६१.१४ विराटनगरे चापि (द्रोण) १५८.१७ विराटस्तत्र संग्रामे हत्वा (विरा)३२.२२ विराटो भगदत्त तु (भीम) ४५.५० विरोधिए महीपाल (वन) १३१.१२ विरराम रणात्तस्मा (द्रोण) १३६.११० विराटनगरे चैव योन्य(शल्य) ५६.३२ विराटस्तु ततः पश्चात (भीष्म १०८.८ विरावश्च मुरावश्च (वन) ६६.१७ विरोधी न कुमन्त्री च (द्रोण) १८२.१७ विरराज रणे राजन् (भीम) ५२.५२ विराटनगरे तात संवत्सर विरा) 2.१८ विराटस्तू सहा:नीक:(भीम) ११५.२८ विरिक्तस्य यथा (शाति) ३०६.१८ विमिभिः सादिभियंस ट्रोण) ८७.१७ विरागवसनाः सर्वे (सभा) २१.२७ विराटनगरे तात (भीष्म) १०६.३५ विराटस्य तु कैकेयी भार्या (विरा) ६.६ विरिच इति यत्प्रोक्त (शांति)३४२.६४ विलक्षवस्तु राजेन्द्रो (बन) १०.३७ विरागस्य च रूपं तु (वन) २१२.६ विराटनगरे भग्नाः (उद्योग) ६४.२५ विराटस्य प्रियो (भीष्म) ११८.२७ विस्तगणा धरणी मत्तद (वन) १८२.४ बिलग्रमध्यश्च स नाभि (वन) ११२.४ विराजमानास्तेऽपश्यस्ति(वन)१५८.६८ विराटपुत्रः शवस्तु (कर्ण) ६.३७ विराटस्य प्रियो (बिरा) ३१.१२ विरुद्धानीह शास्त्राणि (शांति) १६३.१२ विलज्जमाना वस्त्रान्त (वन) ५७.२५
Jain Education Internation
For Private
Personel Use Only
www.jainelibrary.org