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________________ बीममहाभारतम् : श्लोकानुकमची महासुरस्यान्ववाये (आ) २०६.२ महिमानं तु कृष्णस्य (उद्योग) ५३.२० महीं चश्चिता सर्वां (भीष्म) ५४.१३ महेन्द्रवाहप्रतिमेन (कर्ण) १४.५६ महोत्साहा महात्मानो(भीष्म) १०.१० महासरो हतः शक (उद्योग) १६.१४ महिमानं परं चापि (सभा) ४७.१८ मही जगाम माहातं (आश्व) ७६.३५ महेन्द्र विष्णुप्रतिमा (कर्ण) ३७.१४ महोत्साही महात्मानौ (वन) १२४.२० महासेनमेवमुक्त्वा (वन) २३१.११० महिमानं महाराज (द्रोण) १९२.५६ मही विजयते राजा शत्रू(आ) ६२.२१ महेन्द्रशश्वो येन (दोण) ५१.१७ महोदधिमिवापूर्ण (भीष्म)७६.१४ महासेनश्च राजेन्द्र (सभा) ११.५२ महियानप्यतिबलो (द्रोण) ६८.५ महीं स्फीतां ददद्राजन् (अनु) ६२.६१ महेन्द्रसदृशः शोर्यस्थैर्य (भीष्म) १३.८ महोदधिमिवापूर्ण (द्रोण) ११८.११ महास्कन्धो भृशं ह्यष(उद्योग) ६.३० महिषासपिये नित्यं (भीष्म) २३८ मही म्लेच्छजनाकीर्णा (वन) १९०७२ महेन्द्रस्य कुबेरस्य यमस्य (आ)७४.८५ महोदर महाकाय (द्रोण) २०२.४१ भास्कन्धो महोरस्को (द्रोण)११०.५७ महिषी पाण्डपूषाणा (विरा) २०.११ मही वियत् यौः सलिल (कर्ण) १०.४० महेन्द्रस्यापि नेवाणा (आ) २११.२७ महोदरं महेष्वास (भीष्म) ८.२५ महास्त्रवाणाशनि (भीष्म) ६०.२२ महिषी युवराजाभ्यां (आ) ६२.२२ महीवियहिगम्बूनां (कर्ण) ८.६ महेन्द्रो नाम कौरव्य (वन) ८७२२ महोदरस्तु समरे भीम(भीष्म) ८८.१७ महास्त्रसंप्लवे तस्मिन (द्रोण) १४६.२३ महिर्यश्व वराहेश्च (वन) १०.१५ मही वियदिशः सर्वा (कण) ५६.१०५ महेन्द्रो मलयः सह्यः (भीष्म) ६.११ महोरगवराहाच (भीष्म) ६५.५२ महास्वनं महाकार्य (मौप्तिक) १.३८ महिषश्च वराईपच (वन) १५२.७ महेन्द्र इन पौलोभ्या (वन) २६१.४० महेश्वरमुत्सृष्टा (अनु) १४८.४५ रहोरस्को दीर्घबाहुः (उद्योग) ४८.४५ महास्वनाः सुनिर्वाता(शल्य) ५६.६ महिषोऽपि रथं दृष्ट्वा (वन)२३१.६१ महेन्द्र इव लक्ष्मीवानास्ते(स्वर्ग) २४६ महेश्वरश्च महता (दोण) २०२.११५ महोमिणमिवेद तं (द्रोण) १०.१२ महास्वनदुन्दुभिनादित (आ) १८७.१४ महीगत इवात्युनः (द्रोग) १५६.८६ महेन्द्र इब बजेण (उद्योग) ५१.४२ महेश्वरश्च लोकानां (अनु) १६१.२६ महोल्काप्रतिमा (भीम) ४६.३१ महासरः पुष्करणि (शांति) १५२.२८ महीतलाद्गत: स्थानं (शांति)३३६.६५ महेन्द्रकेतवः शुभ्रा (बीडम) १६.१३ महेश्वरसुतप्रख्यामादित्य (वन) ६१.२२ महोषवेग समरे (भीष्म) १०५.३० महास्मृति पठेद्यस्तु (शांति) २००.३० महीधरसमः स्थैर्य (द्रोण) १९४.६ महेन्द्रगुरवः सप्त (अनु) १५०३३ महेश्वरेण यो राजन् (वन) ४६.८ महौषः सलिलश्येव (द्रोण) ३५.५ महाहंकारदीप्तं च गुण (आश्व)४५.६ महीपति रनिर्देश्य (आ) १००.४६ महेन्द्र दानवान् (उद्योग) १६.१६ महश्वरोऽपि पार्थेन (द्रोण) ७५२१ महोषधिसमायुक्त (द्रोण) १३६८६ महाहवे तं बह रोचमान कर्ण)९४.६४ महीपते नरपतिर्य (उद्योग) १२०.१४ महेन्द्रपर्वतं दृष्ट्वा (आ) २१५.१३ महेष्वास नरव्याघ्र (द्रोण) २२.५ मा ततो वै द्विगुणं (वन) ६.१५ महाहवे दीप्यमानान् (भीष्म) ७८.१६ मही गलो महावीर्य (उद्योग) १६.२४ महेन्द्रप्रतिम कार्षिण (भीष्म) १०१.१६। महेष्वासवरंगुप्ता (द्रोण) ३२.६ मांसपिण्डोपमोऽभूत्म (उद्योग) ११३.५ महाहवेष्वप्रतिम महायुद्ध (वन)(१.२१ मही प्रचलिता चासीत (अ) ३२.२० महेन्द्रभिव चादित्य (उद्योग) १५३.३ महेष्वासा राजपुत्रा (उद्योग) ५०.३८ मांसप्रकारान्विविधान् (अन्) ५३.१७ महाह्रद उपस्पृश्य (अनु) २५.४८ मही महीजा: पवन (शांति) २०१६ महेन्द्र वै गिरिश्रेष्ठ(उद्योग) १७६.३१ महेष्वासा राजपुत्रा (उद्योग) ५६.१७ मांसप्रकारविविधैः रवा (सभा) ४.३ महालवं समासाद्य (वन) ११०.३४ महीमालिंग्य सर्वाङ्ग (द्रोण) १४८.५५ महेन्द्रपानप्रतिमं रथं तु (भीष्म)२२.५ महेष्वासो महीभर्ता (अनु) १४६.३२ मांसप्रतिग्रहे चैव मधुनो(अन) १३६.५ महाह्रदः संक्षुमित (शांति) १०४.५३ महीं गताः पार्थबलाभि (भीष्म)८५.४ महेन्द्रनोकगमनम (आ) २.१५६ महोत्साहं महाबाहुं (द्रोण) ७२.३० मांसं च रुधिरं चास्य (अनु) ३२.११ For Private Personal use only
SR No.600055
Book TitleMahabharatam
Original Sutra AuthorNagsharan Sinh
Author
PublisherNag Prakashan Delhi
Publication Year1992
Total Pages840
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size30 MB
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