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अञ्जन प्र.कल्प
॥२४॥
--: अथ नन्द्यावर्त पूजन विधिःसौ प्रथम नन्द्यावर्तना पट्ट उपर नीचेनो श्लोक बोली कुसुमांजलि करवी:कल्याणवल्लीकन्दाय, कृतानन्दाय साधुषु । सदा शुभविवर्ताय, नन्द्यावर्ताय ते नमः ॥१॥
(अनुष्टुभ्) पहेला वलयमां:
“ॐ नमोऽहत्परमेश्वराय, चतुर्मुखाय, परमेष्ठिने, त्रैलोक्यगताय, अष्टदिक्कुमारीपरिपूजिताय, देवाधिदेवाय दिव्यशरीराय, त्रैलोक्यमहिताय आगच्छ आगच्छ स्वाहा” आ मंत्रयी परमेष्ठिमुद्राए जिननु आह्वान करवू. अने पछी "ॐजिनाय नमः" कही वास अने कपूर वगेरेथी जिननी पूजा करवी. ___ त्यार बाद शक्रेन्द्र अने श्रुतदेवता तेमन ईशानेन्द्र अने शांति देवतानी पूजा 'ॐ क्रेन्द्राय नमः'; 'ॐ श्रुतदेवतायै | नमः', 'ॐ ईशानेन्द्राय नमः; 'ॐ शान्तिदेवतायै नमः' ए मंत्रो बोली करवी.
१ मुद्रित प्र. क. मां जिनाह्वान करी कुसुमांजलि करवा जणावेल छे, परंतु हस्तलिखितमा प्रथम कुसुमांजलि पछी जिनाहान विधि छे उचित पण छे तेथी ते प्रमाणे अहीं लोधेल छे. तेमज जिनाहवान मंत्र प्रतिष्ठाकल्पमा नथी छतां य योग्य होवाथी जणावेल छ । २ 'नम:' पद अहीं सर्व जग्याए पूजाना अर्थमां छे, मात्र प्रणामना अर्थमा नथी । ३ शक्रादि चारनां पूजनमंत्र प्रतिष्ठाकल्पमा नथी पण पूजननुं सूचन छे तेथी लीधेल छ ।
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