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अञ्जन प्र.कल्प
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-SUOSITORIO AfterSESS
पंचतीर्थ तरुतले ठवी ए, विधियुत करीये सनात्त तो,
पूजीये बलि नैवेद्यथी ए, ग्रह दिगपाल संघात तो देववंदन विधि साचवी ए, कुंभ ग्रही शुभ च्यार तो,
___ कंठ (लगे) जइ कूपमा ए, श्रीफल श्रीसुखनार तो अंकुश, कूर्म ने मत्स्यनी ए, मुद्रा त्रण्य करेय तो,
वस्त्रपूत जलने करी ए, पूरण कुंभ भरेय तो कूप-कंठे नैवेद्य ठवो र, पूरी मौदिक खास तो,
जल देवी सुप्रसन्न करी ए, मंत्र विसजि तेह तो सिणगारे करी सोमती ए, सधवा मली चउ नार तो,
सजल कलस शिर पर ठवी ए, आवे प्रभु-दरवार तो त्रण प्रदक्षणा देइ ठवे ए, बिबने जमणे पास तो,
धवल मंगल दिये सुंदरी ए, निज मन अधिक उल्लास तो जलयात्रा करी रंगखें ए, सवाइचंद हरखंत तो,
खुसालसाहने वीनती ए, कुंभथापननी करंत तो
HALEGRAHARACTER
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