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अञ्जन
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प्र. कल्प
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॥५७॥
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(स्फटिकनी माळाथी "नमो अरिहंताणं" पदनो यथाशक्य जाप करवो.)॥१॥ २-सिद्धपद :-(पूर्व पत्रमा स्थापना करवी.) स्थापनाश्लोक :तस्य पूर्वदले सिद्धान्, सम्यक्त्वादिगुणात्मकान् ।
निश्रेयसं पदं प्राप्तान , निदधे भक्तिनिर्भरः ॥ १ ॥ | पूजनश्लोक तथा मंत्र :
तत्पूर्वपत्रे परितः प्रणष्ट-दुष्टाष्टकर्मामधिगम्यशुद्धिम् ।
प्राप्तान नरान् सिद्धिमनन्तबोधान, सिद्धान् यजे शान्तिकरान्नराणाम् ॥२॥ (इन्द्रवज्रा) "ॐ ही सिद्धेभ्यो नमः स्वाहा'' मंत्री सिद्ध पदनुं पूजन करवू. (लाल परवाळानी माळाथी "नमो सिद्धाणं" पदनो यथाशक्य जाप करवो.) ॥२॥ ३-आचार्यपद :-(दक्षिण तरफना पत्रमा स्थापना करवी.) स्थापनाश्लोक :
१ प्रतिष्ठा कल्पमा सिद्धचक्रना नव पदोनी नवकारवाली गणवानो उल्लेख नथी पण गणी शकाय तो उत्तम तेथी अहीं आपेल छे.
॥५७॥
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