________________
AE-
अञ्जन प्र. कल्प
॥५४॥
त्यार बाद भूतोने आपवानो वलि नीचेना भूतबलिमंत्रथी त्रणवार मंत्री दशे दिशाओमां धूप-दीप-चंदनपुष्प-जळ-वास-लापसी बाकुळा-घडळा-बड़ां बगेरे सहित बलियाकुळा जिनगृहनी बहार उडाबवा :--
मंत्र :-- ॐ नमो अरिहंताणं, ॐ नमो सिद्धाणं, ॐ नमो आयरियाणं, ॐ नमो उवज्झायाणं, ॐ नमो लोए सब्बसाहणं, ॐ नमो आगासगामीणं, ॐ नमो चारणाइलद्धीणं । जे इमे किन्नर-किंपुरिस-महोरग-गरुल-सिद्ध-गंधव्व जक्ख-रक्खस-पिसाय-भूय-साइणि-डाइणिपभिइओ जिणघरनिवासिणो नियनियनिलयठिया परिचारिणो सन्निहिया असन्निहिया य ते सव्वे इमं विलेषण-धूव-पुष्फ-फल-पईव-सणाई बलि पडिच्छता संतिकरा भवन्तु, तुटिकरा भवन्तु, पुटिकरा भवन्तु, सबत्य रक्खं कुणंतु, सवत्य दुरियाणि नासंतु, सव्वासिवमुवसमंतु, संति-तुढि-पुटि-सुत्थयणकारिणो भवन्तु स्वाहा ॥
अंगन्यास :-पछी नीचेना मंत्री बोलतां (त्रणवार) अंगन्यास करवो:बोलवानो मंत्र
न्यास करवानुं अंग १-ॐ नमः सिद्धम् ।
मस्तक उपर | २-ॐ आँ ह्रीँ क्रो यद वद वाग्वादिनि अर्हन्मुखकमलनिवासिनि नमः॥
मुख उपर ३-ॐ हाँ ही हः अहं नमः ।
हृदय उपर ४-ॐ ह्रीं सर्वसाधुभ्यो नमः।
नष्टबल
नाभि उपर
॥५४॥
Jain Education 1
For Private & Personal Use Only
M.jainelibrary.org