SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 13
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org યુગપ્રધાનાચાય ાવામ મપહલી મહત્વપૂર્ણ ઉલ્લેખ ४ १०] १०. संवत् १३६७ में भीमपल्ली संघ की अपना से महावीर प्रभु को नमस्कार किया वहां फागुन सुदी १ को ३ क और रखकाओं को जिनचंद्रसूरिजी ने दीक्षा दी । । १२ संवत् १३६८ में सा० धनपाल के पुत्र राजमान्य सुधावक साग ने तीर्थयात्रा आरंभ की चैत १३ को चतुर्विध संघ सहिन जिनसूरी ने भीमपी से प्रस्थान किए और शज और गिरनार की यात्रा करके भीमपल्ली लौटे। वहां २ क्षुलकों और २ लिकाओं को बड़े महोत्सव से आचार्यश्री ने दी। १२. संवत् १३७१ में आचार्यश्री फिर भीमडी पधारे और फागुन सुदी ११ को सुश्रावक सामल आदि भीनपल्ली संघ ने अमारि उद्घोषणा पूर्वक व्रत ग्रहण मालारोपण का महोत्सव किया। उसमें साघु व ३ साध्वियों की दीक्षा भी हुई। १३. जिनचंद्रसूरिजी के स्वर्गवास के बाद संवत १३७७ में चातुर्मास करके यहभगणि पुज्यश्री के दिये हुए शिक्षापत्र को लेकर भीमपल्ली में राजेन्द्रचंद्राचार्य के पास पधारे । पाटण में जिनकुशलसूरिजी का पट्टाभिषेक हुआ उसमें भीमपल्ली के श्रावक सामल के पुत्र धीरदेव ने साथर्मियारमस्य किया और । कुशलमूरिजी का अनुरोधपूर्वक प्रथम चौमासा भीमपल्ली में करवाया। वहाँ संवत १३७८ के माघ सुदी ३ को आवक बीरदेव आदि भीमपल्ली के संघ ने दीक्षा मालारोपण आदि का घडा महोत्सव किया जिसका वर्णन गुर्वा बी में है। वहां रहे हुए जिनकुशलसूरिजी ने उपाध्याय विवेकसमुद्र का आयुशेष निकट [ १५४ जानकर भीनपड़ी से वे पाटण आये और जेठ बदी ४ को शरीर स्प होते हुए भी उ स्वस्थ अनशन करवाया । Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir १४. संवत १३७९ में पाटण में बड़ी धर्म प्रभावना हुई उस महोत्सव में भीमपी के श्रावक चीरदेव भी सम्मिलित हुए थे । १३८० में जिनकुशली जय का या संघ निका में आया और महावीर प्रभु वह भीमपी की यात्रा की । १५. के नेतृत्व में १६. संवत १३८१ पाद में पढ़ा प्रतिष्ठा महोत्सव हुआ था उसमें भी भीमपल्ली के संघ मुख्य आवक वीरदेव सम्मिलित हुए थे । इस संपत में भीमपी के कबीरदेव ने ग्यासदीन श्रुतराण से फरमान प्राप्त कर सब देशों में कुकुम पत्रिका भेजकर संघ निकाला या जिसके लिए जिनकुशल सूरिजी भीमपरली पधारे थे। संघ ने वहां से प्रस्थान किया और यात्रा करके वापिस भीमपल्ली में सावण सुदी ११ को आकर महावीर प्रभु को नमस्कार किया इसका विस्तृत वर्णन गुर्वावली में है । १७. संवत १३८२ वैशाख सुदी ५ को areyes में आपके वीरदेव दीक्षा, मालारोपण आदि का महोत्सव किया जिनकुशलसूरिजी ने ४ साधु और २ साध्वियों की दीक्षा दी age was - भाविकाने माला और व्रत धारण किये । १८ संपत १३९३ पद्मसूरी का प्रवेश महोत्सव श्रावक वीरदेव और भीमपल्ली के संघ ने बहुत ही ठाठ बाठ से किया। उपरीत उल्लेखों से सिद्ध है कि संपत १३९३ तक तो भीमपल्ली का विनाश नहीं For Private And Personal Use Only
SR No.533916
Book TitleJain Dharm Prakash 1961 Pustak 077 Ank 10
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Dharm Prasarak Sabha
PublisherJain Dharm Prasarak Sabha
Publication Year1961
Total Pages20
LanguageGujarati, Hindi
ClassificationMagazine, India_Jain Dharm Prakash, & India
File Size9 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy