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आत्मानन्द प्रकाश
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श्व हि रागद्वेषमोहाद्यनिभूतेन संसारिजन्तुना शारीरमानसानेकातिकटुकदुःखोपनिपातपीमितेन तदपनयनाय हेयोपादेय
पदार्थ परिज्ञाने यलो विधेयः
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पुस्तक ११] वीर संवत् १४३९, श्रावण. आत्म संवत् १८ [अंक ?
वन्दे वीरम् । जय जगजीवजोणी विप्राणो जगगुरू जगाएंदो । जगनाहो जगबंधू जया जगप्पिामहो जयवं . ॥१॥ जयइ सुत्राणप्पनवो तित्थयराणं अपच्छिमो जयइ । नया गुरू लोगाणं जयइ महप्पा महावीरो ॥२॥
जयति जगज्जीवया निविज्ञायको जगद्-गुरुजगदानन्दः। . जगन्नाथो जगद्-बन्धुजयति जगत्पितामहो जगवान् ॥१॥ जयति श्रुतानां प्रजवस्तीर्थकराणामपश्चिमो जयति । जयति गुरुलॊकानां जयति महात्मा महावीरः ॥शा
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