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________________ ज्ञानपीठ के प्रांगण से अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. तिवारी ने कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ की प्रशंसा करते हुए आशा व्यक्त की कि देश की अन्य संस्थाओं को इसका अनुसरण कर जैनधर्म एवं दर्शन पर शोधकार्य को विश्वविद्यालयों के साथ जुड़कर विकसित करना चाहिये। प्रो. सुरेशप्रसाद सिंह, कुलपति- आरा उद्बोधन देते हुए प्रो. दुर्गाप्रसाद तिवारी, कुलपति-मेरठ, कुलपति सम्मेलन के कार्य विवरण की पुस्तिका का विमोचन करते हुए। सामने खड़े हैं प्रो. राम श्रीवास्तव (प्राचार्य होल्कर विज्ञान महाविद्यालय), इन्दौर एवं डॉ. अनुपम जैन इस अवसर पर डॉ. शास्त्री द्वारा लिखित पुस्तक The jain Sanctuaries of Fortress of Gwalior' का लोकार्पण किया। भगवान ऋषभदेव राष्ट्रीय कुलपति सम्मेलन के कार्य विवरण की पुस्तिका का विमोचन भी प्रो. तिवारी ने किया। ग्वालियर की पुस्तिका के प्रकाशन हेतु अर्थ सहयोग देने के लिये रमादेवी बिहारीलाल दि. जैन फाउण्डेशन, ब्लूफील्ड - अमेरिका की प्रतिनिधि डॉ. स्नेहरानी जैन, "जैनधर्म : विश्वधर्म' पुस्तक के सृजन हेतु पंडित नाथूराम डोंगरीय एवं कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ को सम्पूर्ण कम्प्यूटर सेट, प्रिंटर आदि उपलब्ध कराने हेतु श्री मानमलजी बोबरा का सम्मान किया गया। मंगलाचरण प्रो. कमलकुमार जैन ने किया तथा आभार माना श्री अजितकुमारसिंह कासलीवाल ने। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डॉ. अनुपम जैन ने किया। 72 अर्हत् वचन, जनवरी 99
SR No.526541
Book TitleArhat Vachan 1999 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year1999
Total Pages112
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size8 MB
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