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________________ वे सराक क्षेत्रों में ही मिलेंगे। अनुपम - तो आपने अब तक 6 - 7 वर्षों में इनके सर्वेक्षण की योजना क्यों नहीं बनाई ? मुनिश्री - बनाई थी। ऋषभदेव फाउण्डेशन के हृदयराजजी के सहयोग से एक विस्तृत योजना बनाई थी, किन्तु दुर्भाग्यवश वह बीच में ही रह गई, व्यवस्थित पुरातात्विक सर्वेक्षण नहीं हो सका। अनुपम - और सामाजिक सर्वेक्षण ? मुनिश्री - हाँ, वह तो हुआ है। स्वं डॉ. कस्तूरचन्द्र कासलीवाल एवं अन्य कई विद्वानों ने काम किया एवं प्रकाशित भी हुआ है। - सयक और ये का सर्वेकर .. कासलीवालजी की किताब नीलमजी की किताब अनुपम - अन्त में मैं अपनी पत्रिका हेतु आशीर्वाद चाहूंगा। आप जानते ही हैं कि कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ की स्थापना 1987 में की गई थी, इसकी विगत वर्षों की प्रगति आख्या आपकी सेवा में प्रस्तुत की है, जिससे इसकी बहुआयामी अकादमिक गतिविधियों की लक झलक मिलती है। ज्ञानपीठ की त्रैमासिक शोध पत्रिका अर्हत् वचन के 10 वर्षों में 40 अंक प्रकाशित हो चुके हैं। 11 वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर जनवरी-99 का अंक 'सराक एवं जैन इतिहास विशेषांक" के रूप में प्रकाशित करने का निश्चय किया गया है। कृपया आशीर्वाद प्रदान करने की कृपा करें। मुनिश्री - अर्हत् वचन द्वारा 'सराक एवं जैन इतिहास विशेषांक' का प्रकाशन बहुत प्रशंसनीय एवं ऐतिहासिक महत्व का कार्य होगा। आपका यह कार्य केवल जैन समाज में ही नहीं, केवल भारत में ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण विश्व में पत्रिका का गौरव बढ़ाने वाला होगा। हमारे जो बन्धु न केवल वर्तमान में अपितु हजारों वर्षों से मांसाहारियों के बीच रह रहे हैं, जो अपने धर्मायतनों (साधुओं एवं गुरुओं) की संगति से वंचित होने के बावजूद अपने संस्कारों एवं संस्कृति को बचाये हुए हैं, ऐसे सराक बन्धुओं का जीवन जनसामान्य, विशेषत: युवाओं के लिये प्रेरणादायी रहेगा। अर्हत् वचन तो बहुत अच्छा काम कर रही है। इस पत्रिका में इतिहास एवं पुरातत्व विषयक सुन्दर, शोधपूर्ण सामग्री सदैव से प्रकाशित होती रही है और अब हमारी आपसे नई कड़ी जुड़ रही है, यह शुभ लक्षण है। सराक क्षेत्र को आप (डॉ. अनुपम जैन) से एवं आपकी पत्रिका से बहुत अपेक्षायें हैं। हमें विश्वास है कि आप इस ओर पूरा ध्यान देंगे। मेरा शुभाशीष सदैव आपके साथ है। अर्हत् वचन, जनवरी 99 59
SR No.526541
Book TitleArhat Vachan 1999 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year1999
Total Pages112
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size8 MB
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