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________________ ૧૨૮ असुन. ०११-२-33 भ३५२ प्रान्तमघटनाभ५२ स्थान है। गाम पायाके बाहिर चामुंडा माता व खेतला धीर जुजार आदि के ६ स्थान है। गाम कोशिलाव तालाबके किनारे घोर दिसा.. चामुंडा माता व पहाड पर मोमा आदिके स्थान है। ग्राम मुटार के बाहर मुंडारा माता का स्थान है। गाम संपादी के मरते हुये पशुधन को बचानो और बचाने में मदद चावडी के पास खेतलावीर का स्थान है। परगना देसूरी गाम किरवा के बाहिर मुंदारा माताजी ब तालाबके किनारे बिदा सकदों पशुओं के भयकर करल के दिन नजदीक आगये हैं।' चौरका स्थान है गाम पीरोका बिठूडा तालाब के किनारे विठूदा अहिंसा परमो धर्म के हिमायती जैन वनेतर सनमः पीर का स्थान है। बिकानेर स्टेटके गांव देखन् गाम मे करागी को घोर निद्रा से जापत हो जाना चाहिये। विचारे सेकटों भालाका स्थान है। बकरें, पेटे, भैसे, अदि मूक पशुओं को देवी, मल, मोमा, खेतमा उपरोक गाँवो के सिवाय अन्य छोटे बड़े मामो में भी माता मामा सेतला इंचार भैरव आदि के स्थानों पर अज्ञानी झुंजार मादिके सम्मुख तीक्ष्ण तलवार से कल होते शुओं को अनपद मांस लोलुपी मनुष्य धर्मके नाम पर बेचारे निदोष बचाकर अभयदान देने का सुअवसर नहीं सोना चाहिये। श्री जीवदया ज्ञान प्रचारक मंडल, मूक पशुओंकी काल करते है। इस लिये चे बेचारे नियोप अपने समीप के गामों में जाकर उपदेश द्वारा पशुओं . पशुओंको अभयदाग दिखाने का हर एक अहिंसा प्रेमी का की जान बचाने में प्रति वर्ष सफलता प्राप्त करता है। कर्तव्य है। परम पूज्य मुनि महाराजा घसीचर्य व साजिओं आपको भी चाहिये फि मंडल की सहायता फर हिंसा रोकने _आर समस्त जैन संघर्ष सजनोंसे प्रार्थना है कि इन दिनों व मासा में ऐसे दिनोंमें अभयदान का लाम अलश्य है। में भाग लीजिये। प्रति वर्ष पशुवध तिथियां नीचे मुजब है श्री जीवदया ज्ञान प्रचारक मंडल को ओ सजन आर्थिक सहायसा वेग चे उपरोक्त पुण्य कार्यका यश दोनों की प्राप्त कर सकेंगे माघ शुक २ से ८ तक ब सख्त दिवस १-१०-१२ + अपनी शक्ति के अनुसार सहायता भेजने की अवश्य कृपा १३-१४ चत्र शुक 1 को स्थापना से भव राशि से स्कती काँगाये जिस मंडल सदस्य जीवों के प्राण बचाने में पूर्ण विवस १०-१२-१३-१४ बैशाख २ से ८ तक सख्त रुफलता प्राप्त करसके। दिवस ९-१०-१२-१३-१४ अझाड शुक्ल २से ८ तक सस्त गेट ऐसे घोर हिंसा के दिनों में पशुओंका जीव बचाने दिवस ९-१०-१२-१३-१४ भाइबा शुषल २ से ८ तक सगत के लिये वध स्थानों पर हमारे मंडल के सदस्य पिकेटिंग करने दिवस ९-१०-१२-१३-१४ आश्विन शुरु, को स्थापना 6. के लिये व उपदेश के साथ अभयदान दिलानेको जाते है। होगा अष्टमी ९-१० दशहरा से १२-१३-१४ तक कार्तिक सो शिवाधारी दयाप्रेमी मित्र मंडल व स्वयंसेवकों व आदि शुल २ से ८ तक सस्त दिवस १-१०-१२-१३ १४ इन सजनासे भोर प्रार्थना है कि मंडल के सदस्य के साथ दिनों में पशुवध बहुत होता है। अन्य मास व दिना में सेवा करनेको साथ होतो अस पधारिये। नहीं तो अपने उपराक्क दिपों का अपेक्षा हिंसा कम होती है। समीप गामों में ऐसे पध स्थानों के पास जाकर अभयदान पशुबध के स्थानों की सूची देनेका लाभ अवश्य लांजीये । . .. . परगना जालोर प्राभ जालोर के सुन्दरा तालाब के किनारे । દેપુર ખુશાલ શાહ चामुंडा माता पुगला, आर मामा आदि स्थान है। ग्राम ।। G. मी थी 20 भ'on, सियान। के बाहिर खेतला गंजार आदि के स्थान है। गामा સ્ટેશન જરપુરારોડ, ગુડાગાલોતરા. आहोर के बाहिर चामुंडा माता और कालिका देवी माता मोमा आदिके स्थान है। ग्राम पटुडा र बाहिर अरर चाबी व तालाब किनारे माता जी, मोमाजी खेतला पीर वार आदि વાંદવા પણુ નથી અાવેલ વહેલા મોઢે આવૐ . ગ જ के स्थान है। ग्राम शंखवाली के यहिर अस्ट व पंचके पर म या xxx xxx ++x xcx xxx मोमाजी आसिया तालावके किनारे येणाका मो जी धीर आदि Socxxxx विगैरे सनार पाने तेमाल xxx सन माम माहाजनक पहाड पर चाधरा माता बदा भना पास मोमा आदिके स्थान है। परगना सिवाण्यागद ग्राम मोकलसार स्टेशन के नजदीक बोंदा जरणा खेतला वीर माताजी व मामाजी શ્રાવણુ મુક્ર ૧૦ સેમવાર मोमी अदि के स्थान हा परगना जसवंतपुरा पर सुन्दा पहाड (142) पर सुम्देस्वरी माता का स्थान है। परगना वाली गाम रिटिया मताभ या भुग शांतिभा भने म्यान पहाड के पास विटियाका स्थान है। गाम चालाणा के यहिरण पते - खेतला वीर व चोधरा माता व मोमा आदि के स्थान हा नांव- वने, २५ २ २०ने नाम गाम कोहरा तालाब के किनारे सेतला बीर व चमँग मसा छ, यदी श्यले नाना नाम छ यो Ivan ५३पना आदि स्थान है। गाम फेरार के पेचके पास हिंगोली धीर का नाम छे, सारी से। ८२ ५४. -त्री Printed by Lalji Harsey Lalan at Mahendra Printing Press, Gays Building Masjid Bunder Road Bombay, 3 and Published by Shivial Jhaverehani Sanghvi for Jain Yuvak Sangh. at 26-30, Dhanji Street Bombay,.
SR No.525795
Book TitlePrabuddha Jivan - Prabuddha Jain 1933 02 Year 02 Ank 15 to 18
Original Sutra AuthorN/A
AuthorChandrakant V Sutaria
PublisherMumbai Jain Yuvak Sangh
Publication Year1933
Total Pages36
LanguageGujarati
ClassificationMagazine, India_Prabuddha Jivan, & India
File Size3 MB
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