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Contents
Our Contributors सम्पादकीय
iv v-vi
1-9
आठ योगदृष्टियाँ (आचार्य हरिभद्रकृत योगदृष्टिसमुच्चय के आलोक में) प्रो0 सुदर्शन लाल जैन
10-28
भेदविज्ञान द्वारा श्रावक-लोभसंवरण डॉ0 अशोक कुमार सिंह
29-38
3. यशस्तिलक चम्पू. में आयुर्वेद
आचार्य राजकुमार जैन
श्रमण-परम्परा : भगवान् ऋषभदेव से पार्श्वनाथ पर्यन्त 39-47 साध्वी संगीतश्री
Multifaceted Symbiotic Philosophy of Jainism and its Contemporary Relevance and Significance 48-66 Prof. S. R. Bhatt
"Ayurveda, Jainism and Medical Tourism - A Study in Interrelationship"
67-72 Partha Bhandari
स्थायी स्तम्भ जिज्ञासा और समाधान (श्रावक एवं श्रमण प्रतिमाएँ) पार्श्वनाथ विद्यापीठ समाचार जैन जगत् साभार प्राप्ति
73-79 80-86 87-89
१०