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होती है। शोर्ट सर्किट होने पर आग की चिनगारियाँ निकलती ही हैं। बल्ब के अन्दर फिलामेंट में वह प्रकाश को भी उत्पन्न करती है।
__ स्कूटर आदि के स्पार्क प्लग में इलेक्ट्रीसीटी चिनगारियाँ को भी पैदा करती ही है। स्पार्कप्लग में एक वायर के सिरे से छलांग मार कर इलेक्ट्रीसीटी चिनगारी के स्वरूप में दूसरे सिरे तक जाती हुई साफ़-साफ़ दिखाई देती ही है। यह बात निश्चित रूप से सिद्ध करती है कि इलेक्ट्रीसीटी अग्निकाय जीवस्वरूप ही है।
High D.C./A.C. पावर जिसमें से प्रसारित होता है उस खुले वायर के साथ यदि ज़मीन पर खड़े हुए व्यक्ति का सीधा संपर्क हो जाए तो वह तुरंत ही निर्जीव होकर काला पड़ जाता है। यदि इलेक्ट्रीसीटी तेउकाय जीव न हो तो उससे आदमी काला कैसे हो जाता है ? इलेक्ट्रीसीटी को तेजोलेश्या तो मान ही नहीं सकते, क्योंकि इलेक्ट्रीसीटी में आतप नाम कर्म का उदय नहीं है। इसलिए उष्णस्पर्श नाम कर्म के उदयवाले तेउकाय जीव के स्वरूप में ही उसका स्वीकार करना मुनासिब लगता है।
इस प्रकार आदमी को कोयले जैसे श्याम करती इलेक्ट्रीसीटी अपने कार्य द्वारा तेउकाय का ही एक विलक्षण प्रकार है-यह बात सिद्ध होती है कि जो सामान्य संयोग में दिखाई नहीं देती। किन्तु ओज़ोन के सम्पर्क में आते ही गतिशील इलेक्ट्रीसीटी को वहन करते हुए खुले वायर में से भूरे (=Blue) रंग का प्रकाश दिखाई देता है कि जो घर्षणजन्य अग्निकाय जीव ही है। यह बात हम अभी देख गए।
इसी प्रकार HighA.C. इलेक्ट्रीसीटी जिसमें से प्रसार होती है उस खुले ट्वीस्टेड दो बड़े वायर को एकदम समीप रखने में आए तो एक वायर में से वह इलेक्ट्रीसीटी वीज़ीबल रेज में आकर प्रकाश स्वरूप को धारण करती हुई दूसरे वायर में तेजी से जाती हुई दिखाई देती है। मतलब कि इनवीज़ीबल रेञ्ज में रही हुई प्रवहमान इलेक्ट्रीसीटी वीजीबल रेञ्ज में आने पर स्पार्क, ज्वाला इत्यादि स्वरूप में दिखाई देती हैं।
जिस प्रकार अत्यन्त क्रोधी मनुष्य छोटी-छोटी बातों से क्रोधित हो जाता हैं उसी प्रकार अत्यन्त तीव्रतम गतिशील इलेक्ट्रीसीटी स्वरूप जलता तेउकाय अत्यन्त संवेदनशील (Sensitive) होने के कारण थोड़ा सा भी निमित्त मिलने पर तुरंत ही विस्फोट-आग-प्रकाश-उष्णता-दाह इत्यादि प्रकट करके अपना तेउकायपना बता ही देता है। एक प्रकार के अग्निकाय द्वारा दूसरे प्रकार का अग्निकाय कुछ ही देर में ही प्रकट हो सकता है-यह बात जगत प्रसिद्ध ही है। योग्य वातावरण, संयोग, साधन सामग्री मिलते ही अत्यन्त तेज़ी से इलेक्ट्रीसीटी में से चिनगारियाँ
और विस्फोट होने का अनुभव कितने ही व्यक्तियों को होता ही है। शोट सर्किट से मंडप इत्यादि में आग लगने की घटनाएँ भी सुप्रसिद्ध ही हैं। तुलसी प्रज्ञा अप्रैल-जून, 2004
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