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________________ जानिए कि हम क्या खा रहे हैं डॉ. अनिल कुमार जैन कुछ दिनों पहले हम ट्रेन में सफर कर रहे थे। हमारे निकट , वास्तव में कुछ बड़े होटल दो-तीन फ्लेवर मिलाकर अपना नया एक सहयात्री बैठे थे। बातचीत के दौरान पता चला कि वे भी जैन | फ्लेवर बना लेते हैं। इसीलिए आपको कई बार एक ही होटल का हैं। हमने उनसे पूछा कि आप क्या काम करते हैं? तो उन्होंने बताया | खाना पसन्द आता है। कि उनके एडीबिलं (खाद्य) कलर्स,फ्लेवर्स तथा प्रिजर्वेटिव्स का जैन - फ्लेवर कितने तरह के हैं तथा ये किनसे बनते हैं? व्यवसाय है। मेरी उनमें दिलचस्पी बढ़ने लगी। मैंने उनसे पूछा कि शाह- मेरे पास सौ प्रकार के फ्लेवर हैं- सभी मसालों, आपका नाम क्या है, तो उन्होंने बताया जसु भाई शाह। फिर तो हम ड्राइ-फ्रूट्स, कोल्ड ड्रिंग आदि सभी के हैं। हींग का फ्लेवर तो दोनों के बीच लम्बी बातचीत चली उसके कुछ संक्षिप्त अंश निम्न | बहुत अच्छे वाला है। मेरे पास अभी एक लेटैस्ट फ्लेवर आया है, प्रकार हैं। बासमती चावल का अभी, यह महँगा है, बारह सौ रूपये किलो। जैन - तो क्या आप आइसक्रीम के फ्लेवर भी रखते हैं। । १ किलो चावल में एक ग्राम पड़ता है। ये सभी फ्लेवर प्रायः शाह-हाँ। सिंथेटिक कैमीकल्स ही होते हैं। कुछ का अव निकाल कर भी जैन - तो एक बात यह बताईये में कि क्या आइसक्रीम में | बनाया जाता है, लेकिन वह मँहगा पड़ता है। कुछ मांसाहारी पदार्थ भी पड़ता है? जैन- जब ये फ्लेवर सिंथेटिक कैमीकल्स हैं तो क्या शाह - कलर और फ्लेवर में तो नहीं होता, स्टेबिलाइजर | नुकसान नहीं करते? में जिलेटिन से बनता है। जिलेटिन पशु जन्य पदार्थ है। लेकिन सभी । शाह- कुछ देशों में तो इनके प्रयोग पर पाबन्दी लगा दी है। आइसक्रीम निर्माता इसका उपयोग नहीं करते। प्रायःकर जो लोकल | लेकिन भारत में चलता है। यदि फ्लेवर्स न हो तो यहाँ की आबादी आइसक्रीम बनाते हैं वे तो इस्तेमाल करते ही हैं। के लिए खाद्य पदार्थों की आपूर्ति ही मुश्किल हो जाय। हाँ, लेकिन जैन - वाड़ीलाल आइसक्रीम वाला तो विज्ञापन में देता है जो अच्छी कम्पनियाँ हैं उन्होंने अपने पैक्ड आइटम्स पर कैमिकल कि प्योर वेजीटेरियन। फ्लेवर एवं कलर' लिखना प्रारम्भ कर दिया है। यह उपभोक्ता के शाह - हाँ, हो सकता है कि वह न करता हो। ऊपर है कि उसे खरीदें या नहीं। वैसे भारत में तो इनकी डिमाण्ड जैन - अच्छा तो फ्लेवर्स के बारे में कुछ बताईये। बढ़ ही रही है। शाह- आज हर चीज का फ्लेवर आता है-- सारे मसाले, जैन- तो क्या कलर भी सिंथेटिक होते हैं। फल और मेवाओं का। आप नाम लीजिए तो सही। शाह - हाँ, वे भी सिंथेटिक कैमीकल्स ही होते हैं। पहले जैन - घी, दूध और क्रीम आदि का तो नहीं आता होगा | पैक्ड आइटमों में प्राकृतिक खाद्य कलर पड़ते थे। अब तो सिंथेटिक शाह- क्या बात करते हो, इन सब का फ्लेवर आता है। घी ही चलते हैं। तो ये थे श्री जसुभाई शाह से हुई बातचीत का सारांश। के फ्लेवर की तो अच्छी डिमाण्ड है। वास्तव में कलर्स एवं फ्लेवर्स वस्तु को इतना आकर्षक लुभावना एवं जैन - और दूध का फ्लेवर? इसकी क्या जरूरत है? दूध | सुगंधित बना देते हैं कि ग्राहक इन्हें देखते ही खरीद ले। उनमें वह तो आसानी से उपलब्ध हो जाता है। गुण है कि नकली वस्तु को भी असली से ज्यादा असली बना दें। शाह- नहीं, दूध का फ्लेवर भी खूब चलता है। इसे बेकरी | इन कलर्स और फ्लेवर्स युक्त खाद्य पदार्थों के आगे घर के बने शुद्ध वाले स्तेमाल करते हैं। जितने भी मिल्क बिस्कुट आते हैं उन सब | पदार्थ अच्छे भी नहीं लगते। इन सबके कारण उपभोक्तावाद के युग में दूध का फ्लेवर स्तेमाल होता है। यदि प्योर दूध बिस्कुट बनाया | में इनका प्रयोग दिन पर दिन बढ़ रहा है। जाय तो उसमें वह स्वाद ही नहीं आयेगा। इसी प्रकार क्रीम बिस्कुट | तो हमने जाना कि हम होटलों में जो लज़ीज़ और लिज्जतदार में क्रीम का फ्लेवर पड़ता है। दूध और क्रीम को छोड़िए खोवे खाना खाकर आते हैं, या फिर देशी घी से निर्मित मिठाई, स्वादिष्ट (मावा) का भी फ्लेवर आता है। आप जो काजू कतली खरीदते हैं | काजू कतली, बादाम व पिस्ता की मिठाई तथा ड्राइ-फ्रूट्स युक्त उसमें प्रायः कर सींगदाना होता है, लेकिन फ्लेवर काजू का डाला आइसक्रीम खाते हैं या कोल-ड्रिंग्स आदि पीते हैं उन सबके जाता है। आइसक्रीम में भी ड्राइ-फ्रूट्स के फ्लेवर स्तेमाल होते हैं। | स्वादिष्ट होने का राज है- सिंथेटिक कलर्स एवं फ्लेवर्स, जो कि जैन-आईसक्रीम, बेकरी, आईटम, तथा काजू कतली में फ्लेवर | हानिकारक होते हैं तथा जिनके प्रयोग पर कई विकासशील देशों ने तो समझ में आया, लेकिन मसालों के फ्लेवर की क्या जरूरत है? | पाबन्दी लगा दी है। शाह - प्रायः सभी होटलों में बिना मसालों के फ्लेवर के | इतना सब जान लेने के बाद अब बाजार की निर्मित वस्तुएँ काम ही नहीं चलता है। यदि सिर्फ असली मसाले डाले जायें तो | खायें या नहीं, यह मर्जी है आपकी। आपको वह स्वाद नहीं आयेगा जो फ्लेवर के साथ आता है। कई बी-२६, सूर्यनारायण सोसायटी, बार लोग कहते हैं कि अमुक होटल का खाना बहुत लजीज है, साबरमती,अहमदाबाद 28 फरवरी-मार्च 2005 जिनभाषित Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.524294
Book TitleJinabhashita 2005 02 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatanchand Jain
PublisherSarvoday Jain Vidyapith Agra
Publication Year2005
Total Pages52
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Jinabhashita, & India
File Size5 MB
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