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________________ परावृत्ति का कथन एक समय प्रमाण अन्यथा नहीं बन सकता। उत्तर- ऐसी आशंका नहीं करना चाहिए। क्योंकि उपशांत इससे क्षीण कषाय (१२ वें गुणस्थान) काल के प्रारंभ में पृथक्त्व | कषाय गुणस्थान में केवल पृथक्त्व वितर्क वीचार ध्यान ही होता वितर्क वीचार ध्यान का अस्तित्व भी सिद्ध होता है। भावार्थ- | है, ऐसा कोई नियम नहीं है (अर्थात् ११ वें गुणस्थान में द्वितीय प्रथम शुक्लध्यान १२ वें गुणस्थान में भी संभव है। शुक्ल ध्यान भी होता है) निष्कर्ष ११ वें तथा १२ वें, दोनों इस पृष्ठ पर यह भी कहा है कि 'उवसंत कसायम्मि | गुणस्थानों में प्रथम व द्वितीय, दोनों शुक्ल ध्यान संभव हैं। एयत्तविवक्त वीचारसंते उवसंतो दु पुछत्तं इच्चेदेण विरोहो होदित्ति | तृतीय शुक्लध्यान १३ वें गुणस्थान के अंतिम अन्तर्मुहूर्त णासंकणिज्ज, तत्थ पुषत्तमेवेत्ति णियमाभावादो।' में समुद्घात के उपरांत ही होता है। गंधकुटी में विराजमान, ___ अर्थ -प्रश्न- यदि उपशांत कषाय गुणस्थान में एकत्व | अरिहंत परमेष्ठी के कोई ध्यान या शुक्लध्यान नहीं होता। चतुर्थ वितर्क अवीचार ध्यान होता है तो 'उवसंतोदु पुछत्तं' इत्यादि गाथा शुक्लध्यान केवल अयोग केवली नामक चौदहवें गुणस्थान में वचन के साथ विरोध आता है। होता है। फेनिल पेय और कीटनाशक हाल में ही सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट | लिंडेन एक घातक कीटनाशक होता है जो शरीर के केन्द्रीय (सी.एस.ई.) के प्रदूषण निगरान प्रयोगशाला (पीएमएल)ने दिल्ली | तंत्रिका तंत्र के साथ प्रतिरक्षी को नष्ट करता है और यह एक जाने वाले उन बारह सॉफ्ट ड्रिंक्स के नमूनों के विश्लेषण का | निश्चित कैंसरजन भी होता है। यह कोल्ड ड्रिंक के शत प्रतिशत परिणाम घोषित किया जिनका विपणन दो बहुराष्ट्रीय कंपनियों | नमूनों में पाया गया। क्लोरोपाइरीफोज़ से निमोनिया, मांसपेशीय कोका कोला और पेप्सिको द्वारा किया जाता है। प्रयोगशाला पक्षाघात, यहां तक कि श्वसन तंत्र की विफलता के कारण मौत परीक्षणों से यह स्पष्ट हुआ कि इन कंपनियों द्वारा विपणन किए भी हो सकती है और यह विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और जाने वाले सॉफ्ट ड्रिंक में यूरोपीय आर्थिक आयोग (ईईसी) के | बच्चों के लिए खतरनाक होता है क्योंकि यह एक संभावित मानकों से कई गुना अधिक कीटनाशकों की मात्रा मौजूद थी। | न्यूरोटेरैटोजेन है (इससे भ्रूण में विकृति उत्पन्न होती है)। यह पेप्सिको के सभी ब्रांडों में कुल कीटनाशकों की औसत मात्रा कीटनाशक शत प्रतिशत नमूनों में पाया गया। इन सभी नमूनों में 0.0180 मिलीग्राम प्रति लीटर थी जो यूरोपीय आर्थिक आयोग | पाये गये क्लोरोपाइरीफोज़ की औसत मात्रा ई.ई.सी. के मानक से (ईईसी) के द्वारा मान्य कुल कीटनाशक सीमा (0.0005mg/ 42 गुना अधिक थी। मैलाथियान 97 प्रतिशत नमूनों में पाया 1) से 36 गुना अधिक है। कोका कोला के सभी ब्रांडों में कुल | गया। मिरिंडा लेमन के नमूने में इसका संदूषण सबसे अधिक कीटनाशकों की औसत मात्रा 0.0150 मिली ग्राम प्रति लीटर थी | था, किसी एक कीटनाशक के लिए ई.ई.सी. की अनुमन्य सीमा जो ई.ई.सी. द्वारा मान्य सीमा से 30 गुना अधिक है। मिरिंडा से 196 गुना अधिक। कोका कोला में ई.ई.सी. के मानक से 137 लेमन संभवतः सबसे संदूषित हैं जिसमें स्वीकृत सीमा से 70 | गुना अधिक मैलाथियान पाया गया।मैलाथियान मानव के यकृत गुना अधिक कीटनाशक पाये गये। पी.एस.एल. ने 16 में सक्रिय होकर मैलाओक्सॉन का निर्माण करता है जो तंत्रिका आर्गेनोक्लोरीन कीटनाशकों, 12 आर्गेनोफास्फोरस कीटनाशकों | तंत्र के लिए घातक होता है। यह एक निश्चित म्यूटाजेन भी हैऔर 4 संश्लेषित पाइरेथ्राइड्स के लिए सॉफ्ट ड्रिंक के नमूनों | अर्थात् यह शरीर की रंगसूत्रीय (क्रोमोसोमल) व्यवस्था के साथ का परीक्षण किया। ये सभी आम तौर पर खेतों या घरों में | छेड़-छाड़ कर सकता है। इन कीटनाशकों के मिश्रण का सर्वाधिक कीटनाशक के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं। घातक प्रभाव होता है। मिश्रण के प्रत्येक घटक की मात्रा अलगसॉफ्ट ड्रिंक्स में मुख्य रूप से चार कीटनाशक डी.डी.टी. | अलग कम प्रभावी हो तो भी एक संकेंद्रण में उपलब्ध होने पर लिंडेन क्लोरोपाइरीफोज़ और मैलाथियान पाये गये (रोचक तथ्य | इसके कई प्रकार के प्रभाव हो सकते हैं। यहां तक कि इन सॉफ्ट यह है कि अमेरिका से प्राप्त कोला के नमूनों में ये संदूषक नहीं पाये | ड्रिक्स का अपशिष्ट उत्पाद भी सुरक्षित नहीं है। केरल के प्लाचीमाड़ा गये)181 प्रतिशत सॉफ्ट ड्रिंक्स के नमूनों में डी.डी.टी.और इसके | कोक संयंत्र से प्राप्त अपशिष्ट उत्पाद में, जो स्थानीय कृषकों को मेटाबोलाइट्स पाये गये।ये कीटनाशक विभिन्न प्रजातियों के लैंगिक | उर्वरक के रूप में बहुत सस्ते दाम में बेचा जा रहा है, भारी धातु विकास में हेर-फेर, वीर्य की गुणवत्ता में क्षरण और महिलाओं में | संदूषक जैसे सीसा व कैडमियम पाये गये। स्तन कैंसर के मामलों में वृद्धि के लिए उत्तरदायी माने जाते हैं।। ड्रीम 2047, अगस्त 2003 सितम्बर 2003 जिनभाषित 27 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.524277
Book TitleJinabhashita 2003 09
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatanchand Jain
PublisherSarvoday Jain Vidyapith Agra
Publication Year2003
Total Pages36
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Jinabhashita, & India
File Size8 MB
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