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________________ गजथभ ८५ हाथीरी जीभ सुजी होये तनीरी ओषद । अलसरो तेल बडरो दुध ऊजलो मेन भगनरा तपसु लगावजी दीन २१, समाध होय । हाथीहे विषाध जुर होय F.7. ते कीम जानीजे । आंख नीली परे पग उारे बहे चुरक चुरक मुत्रे तनोरो ीषद । खेल नीकले नव निला पडे कानरे बिषे सोजे थाय प्रसेवो अधिक आवे तनोरी ओषद । क्रमालो सेर १ कनेर पान सेर १ उबररी छाल सेर १ संष द्राव टं० ४ बालबीली सेर १ समुद्रफेण टं० ६ कांदरी बीज पे० ५ मोथ पे० ५ घोडाच पे० ५ सतवासुंठ पे० २० ऊट कटालो सेर १ कपुर टं० ४ मार्यो तांबो टं० ४ नीबखार टं० ४ सहत पे० ५ कंटासेली पे०१० संखाहोली पे० १० ईरडोली पे० ५ नीबकी नीबोली पे० १० बकायनका फूल पे० ५ गीलोय सेर १ बडबेला सेर १ ए ओषद् सगली पोटली बांधेने नेगडरा पानी माहो उकालजे ते पानी सुकावजे मेथी सेर २ धतुराका बीज पे० ३ सर्व भेला करेने महदीरा पानीसु दीजे, प्रमान पे० ३ भर दीजे दीन २१, समाध होय विषाद जुर जाय । __ हाथोहे ठंढो पारजे तनीरी ओषद । कंटाली थुहरो दुध टं० ३ इरडोलीरो तेल टं० ३ ओषद भेली करने ठंढा चोखा माहे दीजे दीन ३ मद ऊतरे जाय । हाथीकी आंखे बामनी होय तनीरी ओषद । जुनो रू इरनरी लीडो ऊदरारी लीडी बागुल की बीठ बाटेन वासी थुकसु आंखे आजजे दीन २१समाध होय । हाथीरी सुड माहे लोही परे तनीरी मोषद । छोकनी पे० १० कांगसी सेर १ कंकोडी जड पे० ५ बाधनको दुध टं. १, टं ३ चवका आटा माहे लोयो कर दीजे दीन ३ समाध होय । ए हाथीनी जात मृघा कहीजे ते मृघा जातने सपत रोग होय । हाथीने कोठे बाय अधक होय तनीरी ओषद । अजमो सेर २ मोथ सेर २ काचरी सेर २ भेला करेन ऊना पानोमाहे दोजे प्रमान सेर १ भर कुची जोकी माहे दीजे दीन ७ समाध होय । अनी जुरथो मृतजहर होय आंख लोली होय अनी जुरथो आधो तीगसुन पडे हा.... F.8.....बासी लबसु आंखां आजजे समाध थाय दीन ७। हाथीरी आंख कूलती होय अर सुंडसुं टटोलतो होय तनीरी ओषद । क्रमालाका बीज कमल का बीज जायरी कुपल महदीका रससु आंखा अंजन कोजे दोन ७ समाध होय । Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.520757
Book TitleSambodhi 1978 Vol 07
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDalsukh Malvania, H C Bhayani, Nagin J Shah
PublisherL D Indology Ahmedabad
Publication Year1978
Total Pages358
LanguageEnglish, Sanskrit, Prakrit, Gujarati
ClassificationMagazine, India_Sambodhi, & India
File Size9 MB
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