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जुलाई - २०१४
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औदार्य धैर्य गांभीर्यनो जी, सौंदर्य वयदि गुणेह, भूषण जैन-विभूषण जी, भूषण कीर्ति गुणेह. ७ सूरीसर.... धर्मधुरंधर............, भासन करुणासिंधु, जगजीवन छो जगधणी जी, .......... बंधु. ८ सूरीसर.... आक्खेवणी पक्खेवणी जी, संवेयणी सुविचार, निव्वेयणी कथा कही जी, पडिबोहै भवि वार. ९ सूरीसर.... चंद्र परे चढती कला जी, रूपें मयण सनूर, रयण चिंतामणि सारिखा जी, नित नित चढतै नूर. १० सूरीसर....
सूंदर सुरति मोहती जी, सुरपतितुल्य प्रकाश, तारा जिम अन्य तीरथी जी, अधिक न तास उजास. ११ सूरीसर.... प्रगट प्रतापे दीपता जी, सकलसूरीअवतंस, सुरतरु सुरमणि सारखा जी, मुनीजन मानसहंस. २२ सूरीसर.... एकविध असंजम टालताजी, दुविध धरम उपदेस, ज्ञापक गुण त्रण तत्त्वनाजी, जीता कषायकलेश. १३ सूरीसर.... पंच महाव्रत पालता जी, षट् कायक आधार, भय साते भड भंजीया जी, मद आठ चूर्या मार. १४ सूरीसर.... नवविह सुह ब्रह्म व्रतना जी, धारक छो जइधर्म, उपदिसें गुरु स्वयं मुखे जी, नय उपनयना मर्म. १५ सूरीसर.... ज्ञायक अंग इग्यारना जी, बार उपंग वखांण, काठी तेरना जीपका जी, विद्या चउद सुजांण. १६ सूरीसर.... वांचै गुरु व्याख्यानमां जी, सिद्धना पणदश भेद, सोल कला पूरण शशी जी, सतरै संयम भेद. १७ सूरीसर.... त्रिकरण थिर करी टालता जी, अघना स्थान अढार, उगणीस दोस काउसग्गना जी, वारक मोहविकार. १८ सूरीसर.... वीसंस्थानक अजुआलता जी, श्रावकगुण इकवीस, . परिसह बावीस जीपता जी, सुगडांगाध्ययन त्रेवीस. १९ सूरीसर.... कथक वली पालक सदा जी, आणा जिन चोवीश, भावना पचवीस भावता जी, कप्पाज्झयण षट्वीश. २० सूरीसर.... सत्तावीश अणगारना जी, गुणमणि-मुगतामाल, इण भाषणें गुरु अलंकर्याजी, समतापात्र विशाल. २१ सूरीसर....
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