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________________ जुलाई - २०१४ मात लाछलदे उयरे सुखकरु, ओसवाल वंस ओदार । मूलचंद साह शुभ नंदन गाईई, मनवंछित दातार ॥ सिव० ॥२॥ जिहां जिहा विचरे हो पूज्य मनोहरु, तिहा तिहां आणंद थाय । गुण गावे जे श्रावक भगतिसुं, तेहना संकट जाय ॥ सिव० ॥३॥ मरुधर मालव देस वखांणीइं, सोरठनइ गुजरात I पूरव महिमा कीरति गुरुतणी, देस विदेसे विख्यात ॥ सि० ||४|| सहु को मानें आंन प्रतापथी, रूपई अति सुखकार । नव रस वांणी वरसें देसना, श्रीसिद्धांत विचार || सिव० ॥५॥ गुरुविन वाट न लहीइं धर्मनी, गुरु विण न्यान न होय । जुं परदेसी राजानी परइं, वाहननी पर जोइ ॥ सिव० ॥६॥ कलियुगमाहि गौतम सम कह्या, करुणा रस भृंगार । न्यान चरण दर[स]ण सोभता, गुण नवि लाभई पार ॥ सि० ॥७॥ जलनिधि जेम गंभीर, मुख सोहे पूनमचंद । सूर प्रताप तपइ जिम आकरो, श्रीविवेकचंदसूरिंद ॥ सि० ॥८॥ श्रावक श्रावी वंदें हरखसुं, साधु साधवी परिवार । कर जोडी इम विनवे, श्रीचंदनें द्यो सुखकार ॥ सि० ॥९॥ इति ॥ परमपटोधर वंदिइं, सुखदायकजी, विवेकचंद सूरिंद, गछना नायकजी श्रीओसवालवंसमां, सुखदायकजी, जन्म्या पुत्ररत्न, गछना नायकजी कुछ अजुआली आपनो, सुखदायकजी, लीधो संजम भार, गछना नायकजी सा. मुलचंदनो बेटडो, सुखदायकजी, धन लाछलदे मात, गछना नायकजी रूपवंत रलीआंमणा, सुखदायकजी, मुख सोहे पूनमचंद, गछना नायकजी उद्योतकारी उगीया, सुखदायकजी, जिम प्रगट्यो अभिनव सूर, गछना नायकजी सरवे साधु परीवर्या, सुखदायकजी, जिम मानसरोवर हंस, गछना नायकजी सकल सास्वना राजीया, सुखदायकजी, वली जांणें वेद पूरांण, गछना नायकजी वादि सवि हराविआ, सुखदायकजी, सयल सूरी सिरताज, गछना नायकजी भरतखेत्रना मांनवी, सुखदायकजी, तुमने सेवे जोडी हाथ, गछना नायकजी आपं [त]र्या पर तारता, सुखदायकजी, करता भवि उपगार, गछना नायकजी सूरं उगमते गाइयो, सुखदायकजी, पोहती मननी आस, गछना नायकजी संवत अढार बेंतालीसे, सुखदायकजी, श्रावण मास मझार, गछना नायकजी Jain Education International १६९ For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.520565
Book TitleAnusandhan 2014 08 SrNo 64
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2014
Total Pages298
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size4 MB
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