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________________ • प्राचार्य श्री हस्तीमलजी म. सा. • १६५ देकर तत्सम्बन्धी विशाल कोष समाज को समर्पित किया है। आपने लगभग पचास ग्रंथों की रचना की जिनमें मुख्य प्रकाशन इस प्रकार हैं (i) जैन धर्म का मौलिक इतिहास भा० १ से ४ तक । (ii) जैनाचार्य (पट्टावलि) चरित्रावलि । (iii) गजेन्द्र व्याख्यान माला भा० १ से ७ तक । (iv) आध्यात्मिक साधना भा० १ से ४ तक । आप द्वारा निम्न प्रागमों की टीका एवं संपादन भी किया गया(v) बृहत्कल्प सूत्र । (vi) प्रश्न व्याकरण सूत्र । (vii) अंतगड़दसा। (viii) दशवकालिक सूत्र । (ix) उत्तराध्ययन सूत्र । (x) नन्दी सूत्र आदि। (५) प्राध्यात्मिक ज्ञान प्रसारक पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशनचतुर्विध संघ एवं समाज में सम्यग्ज्ञान, दर्शन एवं चारित्र की त्रिवेणी निरन्तर गतिमान हो, प्रवाहित होती रहे, जन-जन में जाग्रति आती रहे, इस हेतु निम्न पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन प्रारंभ हुआ (i) जिनवाणी (ii) वीर-उपासिका (ii) स्वाध्याय शिक्षा (iv) रत्न श्रावक संघ का मासिक बुलेटिन । [ब] चारित्र एवं त्यागमूलक उपलब्धियां यापकी चारित्रिक योग साधना अजब-गजब होने से उससे समाज को अनेक प्रकार की चारित्रिक, नैतिक एवं पारमार्थिक उपलब्धियां मिली हैं। इनमें मुख्य इस प्रकार हैं : (१) प्र० भा० सामायिक संघ की स्थापना-भारत के सुदूर प्रान्तों में भी आपने अनेक परिषह सहन करते विचरण कर, नगर-२, ग्राम-२ में नियमित सामायिक व्रत धारण कराने का एक विशिष्ट अभियान चलाया। परिणामतः Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.229916
Book TitleAcharya Hastimalji ki Sadhna Vishayak Den
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJashkaran Daga
PublisherZ_Jinvani_Acharya_Hastimalji_Vyaktitva_evam_Krutitva_Visheshank_003843.pdf
Publication Year1985
Total Pages7
LanguageHindi
ClassificationArticle & 0_not_categorized
File Size2 MB
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