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________________ August-2004 ____55 55 पनर कलाना पर परमेश्वर तेहनी परज पराझी सोल कलाना निज परमेश्वर परज अनन्तमे बाजी ॥१०॥ तीर्थधणी जे अनंता सिधा तेहनो तेह परीवार अनादितणा जे सिंध अनंता निजनिज ते निरधार । ए परिवार अनंतो सीधां सोल कलानो सरवे सत्तर कलानो स्वामी वीचें अगम निगम अभेवें ॥११॥ ए सिधसासण अलख अपारें ज्योतिलिंग मझार अवगाह अनंतो ज्योति झलामलमाहें नगर वसतारे । त्रीवली त्रीगढ तेज अनंतो सिध अनंतामांहि नवरंगो केवलनयर विराजे केवल तेथ अगाहिं ॥१२॥ अलखधणी गतवरला बुझें पारनगर वसतार केवलज्ञांन कलामांहे देखें एक अनन्त अपार । लोकालोक अलोक अलोकां बुझें पार पच्छाणं मुनीचन्द्रनाथ धणी निज पाशिं पारसनाथ वखाणं ॥१३॥ इति श्री सोडसकला श्रीसीधज्ञानेशक्तेस्वर श्रीमुनीचन्द्रनाथजीप्रकाशिते आदिअनादिकसिधपुरनगर श्रीराजलीला सोडसमीकला । इति सोलकला संपूर्णः । ज्ञानवांणी समाप्तः ॥ अथ श्री आगमविद्या केवलज्ञांनपर्जेश्वर श्रीमुनीचन्द्रनाथजीप्रकासिके सुध भौमीनीवास तथा आगमसारवांणी माहातमकथन हेतु ज्ञानवांणी ।। चालः पारसनाथ धणी परमेश्वर सिंध अनादिक राजा तेमांहिं आदिक पार सिधा नाथ अनंत प्राजा । इण चोवीसें पारसनाथ तीर्थधणी युगराजे पारससासणमां जेह सिझें तेह धणी तेह छाजें ॥१॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.229353
Book TitlePannar Tithi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherZZ_Anusandhan
Publication Year
Total Pages35
LanguageHindi
ClassificationArticle & 0_not_categorized
File Size590 KB
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