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________________ शिवप्रसाद Nirgrantha जिनदत्तसूरि राशिल्लसूरि जीवदेवसूरि 'प्रथम' (जिनस्नात्रविधि के रचनाकार, अनुमानितकाल वि. सं. की नवीं-दसवीं शताब्दी) जिनदत्तसूरि (षष्ठ) ई. स. १२०९ में विवेकविलास और शकुनशास्त्र, के रचनाकार) अमरचन्द्रसूरि राशिल्लसूरि (बालभारत, पद्मानन्दमहाकाव्य, काव्यकल्पलता, काव्यकल्पलतावृत्ति, काव्यकल्पलतापरिमल आदि ग्रन्थों के जीवदेवसूरि (वि. सं. १२९८ के रचनाकार) (सप्तम) शत्रुजय के शिलालेख में उल्लिखित) वायडगच्छ से सम्बद्ध कुछ अन्य अभिलेखीय साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं जो विक्रम सम्वत् की चौदहवीं शती तक के हैं। इनका संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है : संवत् तिथि लेख का प्रकार प्रतिष्ठास्थान संदर्भग्रन्थ ११३९ अनुपलब्ध पार्श्वनाथ की प्रतिमा वीर जिनालय, आबू भाग ५, पर उत्कीर्ण लेख अजारी लेखांक ३९८ ११६१ कार्तिक...? अजितनाथ प्रतिष्ठालेख संग्रह जिनालय, लेखांक १२ ११६२ - सिरोही जैन लेख संग्रह चन्द्रप्रभ जिनालय, भाग-३ जैसलमेर लेखांक २२१८ १२७३ कार्तिक सुदि १ जैनमंदिर, शत्रुजय M. A. Dhaky and गुरुवार मुनि यशोवर्धन L. Bhojakaकी प्रतिमा पर "Some inscriptions उत्कीर्ण लेख on mount Satrunjaya" M. J. V. G. V. Part 1 p. 162-69 No-7 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.229098
Book TitleVayad Gaccha ka Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivprasad
PublisherZ_Nirgrantha_1_022701.pdf and Nirgrantha_2_022702.pdf and Nirgrantha_3_022703.pdf
Publication Year1996
Total Pages9
LanguageHindi
ClassificationArticle & Jain Sangh
File Size416 KB
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