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________________ Vol. I-1995 थारापद्रगच्छ का संक्षिप्त... ८.१३०४ वैशाख सुदि पुरुषोत्तमसूरि चौबीसी । धर्मनाथ मुनि बुद्धिसागर, पूर्वोक्त, जिन-प्रतिमा का | जिनालय, | भाग २, लेखाङ्क ९५५ लेखमाणेक चौक, खंभात . १३०९ मदनचन्द्रसूरि चैत्र वदि ९ ।। शुक्रवार चिन्तामणि वही, भाग २, लेखाङ्क ५४९ पार्श्वनाथ जिनालय, खंभात १०. १३१५) वैशाख सुदि विजयसिंहसूरि | जिनप्रतिमा का | शांतिनाथ | बुद्धिसागर, पूर्वोक्त, भाग लेख जिनालय २, लेखाङ्क ७३५ खंभात पूर्णचन्द्रसूरि ....दि ४ शुक्रवार | संभवनाथ की चिन्तामणि ! नाहटा, पूर्वोक्त, लेखाङ्क प्रतिमा का लेख | जिनालय, ३८५ खंभात | १२. १४४० पौष सुदि १२ शीलभद्रसूरी के संभवनाथ की सुमतिनाथ शुक्रवार | उपदेश से श्रीसूरि चौबीसी प्रतिमा का जिनालय, लेख रतलाम विनयसागर, पूर्वोक्त, लेखाङ्क १६६ १३. १४५० माघ वदि ९, सोमवार सर्वदेवसूरि | वासुपूज्य की | संभवनाथ राधनपुरप्रतिमालेखसंग्रह, पंचतीर्थी प्रतिमा का जिनालय, | सं० मुनि विशालविजय, राधनपुर लेखाङ्क ८२ लेख १४. १४७९ __शांतिसूरि चैत्र वदि २ | गुरुवार आदिनाथ की वीर जिनालय, श्री प्रतिमालेखसंग्रह, प्रतिमाका लेख | थराद, दौलत सिंह लोढा, लेखाङ्क २०६ .१४८३ ज्येष्ठ सुदि ९ मंगलवार आदिनाथ की | शांतिनाथ | वही, लेखाङ्क २६८ धातुकी चौबीसी चैत्य, सुथार प्रतिमा का लेख | सेरी, थराद Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.229087
Book TitleTharapadragaccha ka Sankshipta Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivprasad
PublisherZ_Nirgrantha_1_022701.pdf and Nirgrantha_2_022702.pdf and Nirgrantha_3_022703.pdf
Publication Year1995
Total Pages15
LanguageHindi
ClassificationArticle & Jain Sangh
File Size459 KB
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