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सावी
८१८ ।
| गो. प्र. चिन्तामरिंग केवलि द्वयं श्रीपदोयांते सप्त प्रवत्ति निरवशेष क्षये भवति ।
जीवकाण्ड बडी टीका का पृष्ट ११४१ बहुरी असंयतादिक चारि गुणस्थान वर्तीक जे मनुष्य, बहुरि असंयत देश संयंत गुणस्थानवर्ती उपचार महाव्रत जिनके पाइये हैं एसी प्रार्या स्त्री ते कर्म भूमि में उपजी एसे वेदक सम्यक्त्वी होय हैं, तीन ही के केवली श्रुत केवली दोनों में से किसी के (पाद) चरणमूल में सात प्रकृतियों का सर्वथा क्षय होने से क्षायिक सम्यक्त्व होता है।
प्रश्न :--सूक्ष्म बादर निमोद जीवों की प्रायु का प्रमाण क्या है ?
उत्तर :-नित्यनिगोद इतरनिगोद सूक्ष्म बादर सबको आयु अंतर्मुहूर्त मात्र है । और पृथिवी काय, जलकाय, तेजकाय, वायुकाय के जीव की भी आयु अन्तर्मुहूर्त हैं अंतोमुहूत्तमाऊ साहारण सव्वसुरमाणं इति उक्तत्त्वादिति ।।
चर्चा समाधान नं. ६६ वी. पृष्ट नं. ८४ प्रत्येक और साधारण २ ही नामकर्म है। तीसरा सप्रतिष्ठित नामकर्म और मानना पड़ेगा।
प्रश्न :- चौदह विद्याएं कौनसी हैं ?
उत्तर:-चारों अनुयोग, ५. शिक्षा कल्प, ६. व्याकरण ७. छन्द द. अलंकार, ६. ज्योतिष, १०. निरूक्त ११ इतिहास १२. पुराण, १३. मीमांसा, १४. न्याय ।
. लौकिक विद्याएं १. ब्रह्मा, २. चातुरी, ३, बाल, ४. वाहन, ५. देशना, ६. बाह, ७. जल, ८. रसायन, ६. मान, १०. संगीत, · ११. व्याकरण, १३. वेद, १३. ज्योतिष, १४. वैद्यक .
प्रश्न :- क्या स्त्री भी जीनेन्द्रदेव का पूजाभिषेक करने को अधिकारी है ?
उत्तर :--भगवान बाहुबलि का नेमिचन्द्र सिद्धान्त चक्रवर्ती के सानिध्य में चामुडराय का मान खंडीत करने के लिये गुलिकाय नाम की स्त्री बुडिया ने दूध का अभिषेक किया, यह प्रत्यक्ष प्रमाण है, उस गुलिकाय स्त्री की मूति श्रवण बेल मुल में गोम्मटेश्वर की मूर्ति के सामने बनी है । सहस्त्राब्धि महोत्सव में होने वाला भगवान के अभिषेक को यहां आने वाली करीब सभी माता और बहनों ने किया था। इससे
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