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________________ २६ यशोभद्राचार्य दशांगशास्त्राये ४०५ ४७२१८४ १३०५२ ये महामुनि कहलाये हैं। ११ अंय १४ पूर्व के एक देशशरक शास्त्रज्ञ थे। २७ (भदुबाहू द्वितीय) ४७५ ५१५ २३ २२११२ ३४ ये प्रतिम निमित ज्ञानी है २८ लोहाचार्य अध्याय : नौवां । ईसवी सन् इनके समय में काज दीप से मुनि संघ पक्षपात होकर संघ में चार भाव होगये। २६ अहिवल्याचार्य २८ ६५. ३६ ३६ एका अंग्रेग के एक देश ५६६ ५६३ शास्त्रज्ञ हुये हैं . ५६४९१४ ३१ २१ १२३ १६ १४४ ० १६३ २० १६३ शशाके ६७ १ नन्दी संध १०८५ २ सेन संघ २६ १०७ सिंह संघ ५६. १३७ ४ देव संध भाषनन्याचार्य परमेनाचार्य पुष्पदन्ताबार्य घुसवत्वापार्य सभन्दी प्राचार्य बीरनन्दी कनकनंदी, इन्द्रनन्दी - नेभिचन्द्र , ६३४. ६६३ ६६४ ६५ ये सब धवलादि सिद्धान के पाठी थे इसलिये के पांचों ही सिद्धांत .. चक्रवर्ती कहलाते थे, श्री गौतम मुनिप्रभुसियों का काख का प्रमाण ६८३ वर्ष की है जो श्रुत-लोर्ष में घर मग काल को कारण है वह पैगामी २०२१७ वर्षों में काल दोष से खेद को प्राप्त हो जायेगा । ती भी इस अवधि में चातुर्वधर्य संब का जन्म होता रहेगा। परन्तु सब लोग प्रायः अविनीत, दुर्व दि. असूधक, सप्तमय पोर माह मद संयुक्त पत्य एवं गत्र सहित, कलहप्रिय, क्रोधी, होंगे।
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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