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________________ श्री महावीर के तीर्थ प्रवर्तनकाल से चली पायी हुई, प्राचार्य शिष्य और शास्त्र परिपाठी प्रादि का विवरण कब हो गये। कौन कितने । क्रमांक | प्राचार्य कौन कितने वीर नि. वीर नि. वर्ष तक सालि |द्विस्ति विशेष । परम्परा, । ज्ञान के धारी । संवत से संबत तक शास्त्रों का संवत वाहन ईसवी सन [ उनके नाम । चार किया विक्रम अध्याय : नौवां ] ___२ | ५ । । । । । १० अनुबंध-केवली ये गौतमस्थानी गरखधर (इन्द्रगति सुधमः स्वामी अम्यूस्वामी अनुबंध केवली थे । पूर्व में पूर्व में पूर्व में ४७०६०४ ५२६ ४५८ ५६२ ५१४ ४४६ ५८० ५०२ - ये अंतिमअनबंध केवली ये: - ४ विष्णदुनि (नन्दी) श्रुतकेयली १२ भंग ३१४ पुर्व के ज्ञाता थे श्रुत केवली ये, केवली के समान पदामों की प्ररूपण। करते थे 'चौदह पूर्वी' नाम से विख्यात थे। १३ नन्दीगिष अपराजित गोवर्धन भद्रबाहु (प्रथम) २२ ११५ ३५६ ३३७ ४१० ४६२ ४७१ ३९३ m ये अंतिम श्रुतकेयसी थे। - - विशाखामार्य (विशालमुनि) ११ मंगव १० १६३ पूर्व के ज्ञाता थे पदाथों का यथावत् सम्यक प्ररूपण करते हुये परम निन्थ मुनि कहलाते थे। प्रौष्ठिलाचार्य দ্বিাৰা (नक्षत्र, क्षत्रियांक) जयसेनाचार्य (जन). २६८ २७६ ४३२ ३५४ .४१३ ३२५ -U 306 १२ २०६ २६२ ३६६ ३१
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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