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________________ २ खण्डविद्या धुरंधर सन्मार्ग दिवाकर निमित्तज्ञान शिरोमणि .१०८ प्राचार्य रत्न श्री विमल सागरजी महाराज ख ARORISSA .' .. f ..... ye .. (मंगलमय शुभाशीर्वाद) मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि श्री दिगम्बर जैन कुन्थु विजय ग्रन्थमाला समिति :जयपुर (राजस्थान) से तेरहवें पुष्प के रूप में श्री गोम्मट प्रश्नोत्तर चिंतामणि ग्रन्थ का प्रकाशन हो रहा है। इस ग्रन्य का संग्रह गरमधराचार्य कुन्थु सागर जी महाराज ने किया है। गाधराचार्य महाराज का ज्ञान ध्यान अच्छा हैं. उनको हमारा पूर्ण आशीर्वाद है. । ग्रन्थमाला समिति ने अल्प समय में अच्छे से अच्छे ...। प्रकाशनों के माध्यम से साधुवर्ग व समाज में अच्छि प्रतिष्ठा प्राप्त कर ली है 1. इसके लिये ग्रन्थमाला के प्रकाशन संयोजक श्री शान्ति .. कुमार जी गंगवाल व उनके सहयोगियों को हमारा पूर्ण प्राशीर्वाद है कि आगे भी इसी प्रकार से और भी महत्त्वपूर्ण ग्रन्थों का प्रकाशन करवाकर, जिनवाणी का प्रचार-प्रसार करते रहे । यह ग्रन्थः साधुवर्ग व गृहस्थियों के लिए बहुत ही उपयोगी व महत्त्वपूर्ण है, इसलिये सभी स्वाध्याय करके इससे लाभ उठावेंगे। -प्राचार्य विमल सागर videise.xox:vassnowerwisoriandwinn 5 .
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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