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की बिजयामति माताजी के फोटो प्रकाशित कर इसका विमोचन न्यूयार्क निवासी स्नेही गुम्म भक्त श्री महेन्द्र कुमारजी पाण्ड्या व उनकी धर्म पत्नि श्रीमति श्राशा- . देवीजी पाण्डया के करकमलों द्वारा करवाया। दोनों फोटो बहुत ही सुन्दर ब.
मोहक हैं। विशिष्ट गुरूभक्तों को निःशुल्क वितरण की गई है। इसके साथ-- .. मार्थ जिन मन्दिरों व क्षेत्रों पर समिति द्वारा फ्रेम में. जड़वाकर फोटो लगवाये माये है। गोम्मट प्रश्नोत्तर चितामरिण" ..
- इस ग्रन्थमाला की अनुपम भेट तेरहवां पुष्प 'गोम्मट प्रश्नोत्तर चितामरिख है। इस ग्रन्थ के संकलन कर्ता परम पूज्य श्री १०८ गणधराचार्य कुंथुसागरजी.
महाराज हैं। पुस्तक के संबंध में परम पूज्य श्री १०८ गरगंधराचार्य कुंथु सागर जी कर महाराज के विचार निम्न रूप से हैं ।
ग्रंथ में करणानुयोग, द्रव्यानुयोग प्रादि सभी प्रकार का पचाएं संग्रहित की की गई है और साधार लिया गया है जिनांगम का, मैं समझता हूं कि स्वाध्याय प्रेमियों को इस एक ही ग्रंथ के स्वाध्याय करने से जिनागम का बहुत कुछ ज्ञान हो सकता है, इस ग्रंथ में गुणस्थानानुसार श्रावक धर्म; मुनि धर्म, आत्म ध्यान, पौंडस्थ, रूपातीत ग्रादि ध्यान और उनके चित्रों सहित वर्णन किया गया है, और भी अनेक सामग्नी मकलित की गई है। यह ग्रंथ अपने आप में एक नया ही संग्रहित हुआ है, इस ग्रंथ में सभी ग्रंथों से लेकर २१७८ पलोकों का संग्रह है। . .
. इस ग्रंथ में पूर्वाचार्यकृतः गोम्मटसार, जीवक्रांड, त्रिलोकसार, मूलाचार, जानाणंच, समयसार, प्रवचनसार, नियमसार, रत्नकरंड, श्रावकाचार, तत्त्वार्थ सूत्र, .. राजवातिक, प्राचारंसार, अष्टपाहुङ, हरिवंश पुराण, आदि पुराण, बसु नन्दी श्रावकाचार, परमात्म प्रकाश, पुरुषार्थ सिद्धयुपाय, समयसार कलश, धवलादि, उमा स्वामी का श्रावकाचार, जैन सिद्धान्त प्र., दशभवत्यादि संग्रह, चर्चाशतक, चर्चा समाधान, स्याद्वाद चन, चर्चासागर, सिद्धान्त सार प्रदीप, मोक्ष मार्ग प्रकाशक, त्रिकाल वर्ती महापुरुष प्रादि बड़े-बड़े ग्रंथों का आधार लेकर संग्रह किया गया है।"
- इस प्रकार पाठकगरण अंवलोकन करे कि ग्रन्थमाला समिति के सीमित आर्थिक ... साधन होते हुए भी इतने कम समय में उपरोक्त महत्वपूर्ण ग्रन्थों के प्रकाशन करवाने में ...
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