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६-५-८२ को श्री पार्श्वनाथ चलगिरि अतिशय क्षेत्र जयपुर (राजस्थान) में न्यायोजित ...
पंचकल्याणक महोत्सव के शुभावसर पर भारत गौरव श्री १०८ प्राचार्यरत्न देश... भूषणजी महाराज के करकमलों द्वारा विमोचन करवाया गया। इस समारोह में भी , . देश के विभिन्न प्रान्तों से गाये दुये काफी संख्या में लोगों ने भाग लिया और समारोह बहुत ही सुन्दर रहा। समारोह की अध्यक्षता श्री सुरेशचन्दजी जैन दिल्ली वालों .. ने की। तजो मान करो ध्यान
भारत गौरव प्राचार्यरत्न श्री १०८ देशभूषरणजी महाराज का चातुर्मास । वर्ष १९८२ में जयपुर में हश्रा. और इसी वर्ष दशलक्षण पर्व के · शुभावसर पर समिति ने अपने तृतीय पुष्प "तजो मान करो ध्यान" का प्रकाशन करवाकर प्राचार्य श्री के ही करकमलों द्वारा दिनांक २६-८-८२ को महावीर पार्क जयपुर (राजस्थान) में हजारों नर-नारियों के बीच इस पुस्तक का विमोचन करवाया । यह समारोह भी बहुत ही सुन्दर था । . हुम्बुज श्रमण सिद्धांत पाठावलि---
ग्रन्थमाला समिति ने चतुर्थ पुष्प "हुम्बुज श्रमण सिद्धान्त पाठावलि" ग्रन्थ का प्रकाशन करवाकर इसका विमोचन परमपूज्य श्री १०८ गणधराचार्य कुन्थुसागरजी : महाराज के हासन (कर्नाटक) चातुर्मास में आयोजित इन्द्रध्वज विधान के विर्सजन
के शुभावसर पर दिनांक २-१२-८२ को हजारों जनसमुदाय के बीच बड़ी धूमधाम से इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रन्थ राज का विमोचन करवाया । इस समारोह में मूडबद्री व जैनबद्री के भट्टारक महास्वामीजी भी उपस्थित थे ।
हुम्बुज श्रमग सिद्धान्त पाठावलि एक महत्वपूर्ण ग्रन्थरत्न है। यह पत्थ लगभग ७५ ग्रन्थों का. १००० पृष्ठों का गुटका है। इसमें साधुनों के पाठ करने के सभी आवश्यक स्तोत्रों का संकलन कर प्रकाशन करवाया है । इस ग्रंथ के प्रकाशन से साधुनों को अनेक ग्रन्थ साथ में नहीं रखने पड़ेंगे। साधु संघ के विहार के समय अनेक ग्रन्थों को मार्ग में ले जाने में जो दिक्कत होती थी, वो अब नहीं होगी और साथ ही जिनवाणी का भी अविनय नहीं होगा । मात्र एक ही ग्र'थराज (हुम्बुज श्रमण
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