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* भजन *
कुंथु सागर, गुरुवर हमारे, हमको दर्शन दे रहियो । मन मन्दिर में आ जइयो || टेक || रेवाचन्द के राज दुलारे, सोहनी देवी के प्रारण पियारे । हमको दर्शन दे रहियो, मन मन्दिर में या जइयों ॥१॥ बीस वर्ष में दीक्षा धारी छोड़ी हैं धन दौलत सारी शरण हमें स्वामी ले रहियो, मन मन्दिर में श्रा जइयो ॥ २ ॥ भेष दिगम्वर तुमने बारा, सकल भेद विज्ञान संवारा । भेद ज्ञान दरशा जइयो मन मन्दिर में आ जइयो || ३ ||
मंडल को है शरण तिहारी, पूरी करना आश हमारी । मोक्षमार्ग बतला जइयो, मन मन्दिर में श्राजइयो ||४||
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संकलनकर्ता शान्तिकुमार गंगवाल