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बनाने का कार्य श्री १०५ प्रा. कुलभूषण श्री माताजी ने किया है. और अन्य महानुभावों ने जिन्होंने किसी भी रूप में सहयोग किया है, सबको मेरा आशीर्वाद है। ..
इस ग्रंथ में सभी प्रकार का विषय प्रतिपादित किया गया है । इस ग्रंथ के प्रकाशन हेतु जिन-जिन दातारों ने गुप्त रूप से सहयोग देकर अपने धन का सद्उपयोग किया है उनको मेरा पूर्ण आशीर्वाद
... ग्रंथ प्रकाशन कार्य बहुत कठिन होता है । हमारे ग्रंथमाला के कर्मट कार्यकर्ता प्रकाशन संयोजक श्री शांतिकमार जी गंगवाल हैं। जो बहुत ही प्रयत्नशील हैं, तथा सच्चे पुरुषार्थी हैं। इनके सुपुत्र प्रदीपकुमार भी ग्राप जैसे हैं। इन्हीं के कारण यह् . ग्रंथमाला बहुत ही वृद्धि कर रही है और इन्हीं के कठिन परिश्रम से इस ग्रन्थमाला अब तक १२ ग्रंथ प्रकाशित हो चुके हैं। और यह १३वा - ग्रंथ प्रकाशित हुया है। इसके लिये श्री शांतिकुमार जी, प्रदीप कुमार जी
गंगवाल व ग्रंथमाला के सभी कार्यकर्ताओं को मेरा बहुत-बहुत ___ शुभाशीर्वाद है। . . . . .
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गधराचार्य कुन्थु सागर
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