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[प्रन्थ सूची-पंचम माग
१०६६२. सिद्धचक्र पूजा-शुभचन्द्र। पत्र सं० १०८ । भाषा-संस्कृत | विषय -स्तोत्र । २० काल ४ । ले०काल x। मपूर्ण । वेष्टन सं० ५६/३१४ । प्राप्ति स्थान--दि० जना मन्दिर संभवनाथ उदयपुर।
विशेष- इसका नाम सिद्ध यंत्र स्तवन भी दिया है ।
१०६६३. सुदृष्टितरगिनी भाषा-टेकचन्द । पत्र सं० ४२६ । प्रा० १४२४७ इन्च । भाषा-हिन्दी गद्य । विषय-मुभाषित । २० काल मं० १९३८ सावण सुदी ११ । ले. काल सं० १९०७ बंषास्त्र सूदी १४ । पूर्ण । वेष्टन सं० १७४ । प्राप्ति स्थान-दि० जन मन्दिर अभिनन्दन स्वामी दी।
विशेष-सवाई जयपुर में ब्राह्मण जमनालाल ने वि. सदासुखजी तथा पं० चिमनलाल जी बूदी वालों के पठनार्थ प्रतिलिपि की थी। प्रधानथ १६२२२ पंडितजी की प्रशस्ति:
प्राचार्य हपंकीर्ति-मं० १६०७ प्राचार्य श्री हरिकीतिजी संवत् १६६६ के साल टोडा में हमा, ज्यांकी वान छत्री हाल मौजुद । रयाक शिष्य रामकीति, तशिप्य भवनकीति, टेकचंद, पेमराज, सुखराम, पघकोत्ति दोदगज पंडित हए । तशिष्य छाजूराम, ततशिष्य पं.दयाचंद, नाशिष्य ऋषभदागत.शि. सेवाराम, द्वितीयगरसीदास, तृतीय साहिबराम एतेषां मध्ये पं. इंगरसीदास के शिष्य सदासुन शिवलाल मणिग्य रतनलाल, देवालाल मध्ये वृहत् शिष्येन लिपीकृता । पं. चिमनलाल पठनार्थ ।
मा हश्रा बू'दी के खेडे पंडित शिवलाल। बाग बरणाया तसि जिनने तलाब ऊपर न्यारा । सब दुनिया में शोभा जिनकी रूपया देव उभाग। जिनका शिप्य रसनलाल पौत्र नेमीचंद प्यारा॥ संवत् १६०७ के मई ग्रंथ लिखाया सारा । जाग दुकाना कटला का दरवाजा बणाया नागदी माई ।।
१०६६४, प्रतिसं०२। पत्र सं० ५२४ । प्रा. ११४ च । ने.काल सं० १९६८ । पूर्ण। वेष्टन सं०८० । प्राप्ति स्थान --दि० जैन मंदिर पायर्वनाथ इन्चरगत ।
विशेष- ईमरलाल पांदवाड ने प्रतिनिपि' की थी।
१०६६५. सूक्तावली-४ । पत्र सं० १-५५ । प्रा. १०x४३ इञ्च । भाषा-संस्कृन । विषयशुमापित । २० काल x ले० कान X । बेष्टन सं०७२१ । प्रपूणे । प्राप्ति स्थान-दि. जैन मन्दिर लश्कर जयपुर।
१०६६६. सूयं सहस्रनाम- - । पत्र सं० ११ । पा. ७१४३३ इच। भाषा-संस्मत । विषय-स्तोत्र । र० काल ४ । ले०काल X । पूर्ण । वेष्टन सं० ११०७ । प्राप्ति स्थान-भ० दि० जन मंदिर प्रजमेर 1
विशेष-मविष्य पुगरा में से है।