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________________ स्तोत्र साहित्य ] [ ३१ ३६१. उपदेशसज्माय-रंगविजय । पत्र सं० ४ । प्रा० १.४४६ इच। भाषा-हिन्दी । विषयस्तोत्र । र० काल x।काल XI पूर्ण | वे० सं० २१३। अभण्डार । विशेष- रंगविजय श्री रत्नहर्ष के शिष्य थे । ३७६२. प्रति सं०२। पत्र सं०४ । ले० काल-1 अपूर्ण । बे०सं० २१९१ | अ भण्डार । विशेष-३रा पत्र नहीं है। ३७६३. उपदेशसज्झाय-देवादिल । पत्र सं. १ । प्रा० १०४४३ इ-1 भाषा-हिन्दी । विषमस्तोत्र । २० काल ४ । ले. व पुर्ण । है . २१६९ । परमार ३७६४. उपसर्गहरम्तोत्र-पूर्णचन्द्राचार्य । पत्र सं० १४ । मा० ३१.४१ इन । भाषा-संस्कृत प्राकृत । विषय-स्तोत्र । र० काल X । ले. काल सं० १५५३ पासोज सुदी १२ । पूर्ण । ३० सं०४१ | च भण्डार । विशेष-श्री वहगच्छीय भट्रारक गुरगदेवमूरि के शिष्य गुणनिधाम ने इसकी प्रतिलिपि की थी। प्रति यन्त्र सहित है। निम्नलिखित स्तोत्र हैं। नाम स्तोत्र कत्ता भाषा पत्र विशेष १. अजितशांतिस्तवन प्राकृत संस्कृत १ से ६ ३६ गाथा विदोष-आचार्य गोविन्दकृत संस्कृत वृत्ति सहित है। २. भयहरस्तोत्र-... संस्कृत ६ से १० विशेष-स्तोत्र अक्षरार्थ मन्त्र गभित सहित है। इस स्तोत्र की प्रतिलिपि सं० १५५३ पासोज मुदी १२ को भेदपाट देश में रामा रायमाल के शासनकाल में कोठारिया नगर में श्री गुणदेवसूरि के उपदेश से उनके शिष्य ने की थी। ३. भग्रहरस्तोत्रx ११ से १४ विदोष—इसमें पार्श्वयक्ष मन्त्र गभित अष्टादश प्रकार के यन्त्र की कल्पना मानतुंगाचार्य कृत दी हुई है। ३७६५. ऋषभदेवस्तुति-जिनसेन । पत्र सं० ७ । मा० १०३४५ इंच । भाषा-संस्कृत | विषय-- स्तोत्र । २० काल XI ले. काल X । पूर्ण । वै० सं० १४६ | छ भण्डार । ३७६६. ऋषभदेवस्तुति-पमनन्दि । पत्र सं० ११ । प्रा० १२४६३ च । भाषा-प्राकृत । विषयतात्र । २० काल X । ले. काल X1 पूर्ण | वे० सं० ५४६ । अ भण्डार । विशेष-वें पृष्ठ से दर्शनस्तोत्र दिया हया है। दोनों ही स्तोत्रों के संस्कृत में पर्यायवाची शब्द दिये हुये हैं।
SR No.090395
Book TitleRajasthan ke Jain Shastra Bhandaronki Granth Soochi Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKasturchand Kasliwal, Anupchand
PublisherPrabandh Karini Committee Jaipur
Publication Year
Total Pages1007
LanguageHindi
ClassificationCatalogue, Literature, Biography, & Catalogue
File Size19 MB
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