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________________ न T 4 - योगशास्त्र ] विषय- योगशास्त्र ग्रन्थ संख्या - २ १५२ ज्ञानाय - श्राचार्य शुभचंद्र | पत्र [सं० रचनाकाल X| लेखनकाल - सं० १७७३ | पूर्ण एवं सामान्य शुद्ध दशा- सामान्य | वेष्टन नं० २६५ ॥ : साइज १९९५ च | भाषा-संस्कृत विषय - योग । विषय-पुराण प्रन्थ संख्या २२ १५ 3 १५३ योगसार - पन्नालाल चौधरी । पत्र सं २३ । साइज १२० इञ्च । भाषा - हिन्दी । विषय-योग | रचनाकाल सं०–१६३२ | लेखनकाल अं० १९४० । पूर्ण एवं शुद्ध 1 दशा- उत्तन | बैप्टन नं० १५८ ॥ १५४ आदिपुराण - आचार्य जिनसेन और गुणभद्र । पत्र सं० ४५६ | साइज ११३४५ इव । भाषा-संस्कृत | विषय-पुराण [रचनाकाल × | लेखनकाल सं०- १७३३ वैशाख सुदी १३ । पूर्ण एवं सामान्य शुद्ध । दशा - सामान्य । वेष्टन नं० १ | विशेष - क्लिष्ट शब्दों के संस्कृत में पर्यायवाची शब्द दिये हुये हैं । १५५ आदिपुराण - म० सकलकीर्त्ति । पत्र सं० - १५७ | साइज ११४५ इञ्च | भाषा-संस्कृत । विषयपुराण | रचनाकाल x | लेखनकाल- सं० १७६० भादवा मुदी १४ । पूर्ख एवं शुद्ध । दशा - उत्तम | वेष्टन नं ० २ ॥ विशेष- मलूकचंदजी तथा उनकी स्त्री मलकादे ने पंचपरमेष्ठी मतोयापन के अवसर पर अन्य की प्रतिलिपि करवायी थी । १५६ आदिपुराण - पंडित दौलतरामजी | पत्र सं ० ६६६ | साइज १२४५३ च । भाषा - हिन्दी गद्य ! विषय-पुराण । रचनाकाल - सं० १८२४ आसोज बुदी १२ । लेखनकाल ४ । पूर्ण एवं शुद्ध । दशा - सामान्य । वेष्टन नं० ३ 1 विशेष - तीन प्रकार की लिपियों का सम्मिश्रण हैं । प्रथम पांच पत्रों का विषय तीन पत्रों में ही लिखा हुआ है । १५७ उत्तरपुराण-श्री खुशालचन्द काला 1 पत्र सं० १३६ | साइज १२४५ इञ्च । भाषा - हिन्दी । विषय-पुराण | रचनाकाल - सं० १७६६ असोज सुदी १० । लेखनकाल पूर्ण । दशा - सामान्य | वेष्टन नं० २० । । | १५८ नेमिनाथपुराण - ब्रह्मनेमिदत्त | पत्र सं० - १७५ पुराग्य 1 रचनाकाल x ३ लेखनकाल x | अपूर्ण प्रारम्भ के ५५ पत्र वेष्टन नं ० – १७५ । साइज - ११४५ इव । भाषा-संस्कृत । विषयनहीं हैं । सामान्य शुद्ध । दशा - सामान्य | १५६ पद्मपुराण - श्राचार्य र विषेण | पत्र सं - ४३६ | साइज १२५ ३ इञ्च । भाषा-संस्कृत | विषय - पुराण | रचनाकाल x | लेखनकाल । पूर्ण एवं सामान्य शुद्ध दशा - सामान्य । वेष्टन नं ०-६५ । विशेष- दो प्रतियों का सम्मिश्रण हैं । १६० पद्मपुराण - भट्टारक सोमसेन | पत्र सं० २७६ | साइज - ११४६ ६ | भाषा-संस्कृत | विषय - पुराण |
SR No.090393
Book TitleRajasthan ke Jain Shastra Bhandaronki Granth Soochi Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKasturchand Kasliwal
PublisherPrabandh Karini Committee Jaipur
Publication Year
Total Pages446
LanguageHindi
ClassificationCatalogue, Literature, Biography, & Catalogue
File Size11 MB
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