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________________ [ धर्म तथा श्राचारशास्त्र | साइज १६४५ इव | भाषा-संस्कृत | विषय - श्रावक दशा - सामान्य | बेटन नं० ७७ । ७८ धर्मोपदेशश्रावकाचार - नेमिदत ! ५२ ० २३ थर्मो वर्णन | रचनाकाल | लेखनकाल- सं० २७५= | पूर्ण एवं शुद्ध ७६. धर्मोपदेश संग्रह-संवारामसाह | पत्र सं० २३७ । साइज ११४३३ इव । भाषा - हिन्दी | विषय-धर्मं । रचनाकाल × । लेखनकाल | पूर्ण एवं शुद्ध | दशा उत्तम | वेष्टन नं० ७६ । विशेष – कधि प्रशस्ति दी हुई है । ० पद्मनदि श्रावकाचार - मुनि पद्मनंदि । पत्र सं० ३= | साइज १३५५ थम वर्णन | रचनाकाल x | लेखनकाल- सं० १४८० | पूर्ण एवं शुद्ध । दशा - सामान्य | वेष्टन नं० १०४ | | भाषा - संस्कृत | विषय - श्रावक = पुरुषार्थसिद्ध युपाय- श्रमृतचन्द्र सूरिं । पत्र सं० २७ | साइज १२४६ इ | भाषा-संस्कृत विषय-धर्म रचनाकाल x | लेखनकाल - सं० १८१७ असोज बुद्दी ३ पूर्ण एवं शुद्ध दशा - सामान्य । वेष्टन नं ० १०७ | विशेष – प्रसे सटीक हैं। टीका संस्कृत में है । पर प्रश्नोत्तरोपासकाचार- श्री बुलाकीदास | पत्र सं० १४५ | साइज १२५ ह । मात्रा - हिन्दी विषय आवक धनं वर्णन | रचनाकाल - सं० १७४७ । लेखनकाल - सं० २६४१ पूर्ण एवं शुद्ध दशा- सामान्य । येष्टनं नं १०- ३ विशेष – नासरोधा ग्राम में दीवान धनकरजी तेरापन्थी मे प्रतिलिपि करवायी थीं । ३ प्रश्नोत्तरभावकाचार मट्टारक सकलकीत्ति | पत्र सं० ५५ | साइज १२x६ इच | भाषा संस्कृत | - श्रावक धर्म वर्णन | रचनाकाल x | लेखनकाल X] पूर्ण एवं सामान्य शुद्ध । दशा - सामान्य । वेष्टन नं० ६६१ । प्रति नं २ | पत्र ०७१ | साइज ११४ इ | लेखनकाल x t अपूर्ण एवं सामान्य शुद्ध | दशा - सामान्य | बेटन नं० २६६ | प्रति नं ३ | पत्र सं १ | साइज १२४६ इ | लेखनकाल - सं० १७६५ । पूर्ण एवं शुद्ध दशासामान्य | वेष्टन नं १०८ । विषय - सागर ने जयपुर में महाराजा सवाई जयसिहजी के शासनकाल में अन्य की प्रतिलिपि की थी । ६ प्रति नं० ४ पत्र ० ५४ | साइज ११४४ इम । लेखनकाल | पूर्ण एवं सामान्य शुद्ध । दशा - जीर्णे | वेष्टन नं ० ७७ । ८७ मूलाचार - शिवकीर्त्ति | पत्र सं० ३७ | साइज १०३४५ च । भाषा संस्कृत | विषय - श्रावक धर्मं वर्णन । रचनाकाल × | लेखनकाल X। अपूर्ण एवं सामान्य शुद्ध | दशा - सामान्य । वेष्टन नं १५३ । मिथ्यात्वमतखंडन - श्री बखतराम | पत्र सं० ६७ | साइज ४६३ इ । भाषा-तेरहपंथियों के मत का खण्डन । रचनाकाल-सं० १८७० । पूर्ण एवं शुद्ध दशा उत्तम वेन नं० १४६ | मोक्षमार्गप्रकाश-पत्र टोडरमलजी | रचनाकाल | लेखनकाल सं० १९९५ ३ पूर्ण एवं शुद्ध विशेष – पत्र १४४ से आगे का भाग सं० पत्र सं० २३६ | साइन दशा उत्तम । बेष्टन नं ० १४६ | १६६५ में पूर्ण करवाया गया था । १२४६३ इञ्च | भाषा - हिन्दी । त्रिषय-धर्म
SR No.090393
Book TitleRajasthan ke Jain Shastra Bhandaronki Granth Soochi Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKasturchand Kasliwal
PublisherPrabandh Karini Committee Jaipur
Publication Year
Total Pages446
LanguageHindi
ClassificationCatalogue, Literature, Biography, & Catalogue
File Size11 MB
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