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________________ [ व्याकरण १५७४ सिद्धान्तकौमुदी-मोदीक्षित ० १४१०३५ भाषा-संस्कृत विश्व व्याकरण रचनाकाल x | लेखनकाल x | पूर्वार्द्ध पूर्वं । सामान्य शुद्ध दशा- सामान्य | वेष्टन नं० २०५६ | १९७५ प्रति० १२० १०३६ हथ लेखनका उत्तरार्द्ध पूर्ण एवं सुद्ध ! X ! | ! | साइज - दश] उसन वेष्टन नं.२०६०। २६४ + १५७६ प्रतिनं ३ १४०-२२६ इम्ल लेखनकाल पूर्ण पूर्वार्द्ध तक सामान्य | दशा-थम २०६१ । १५४१२१४९ । लेखनकाल X पूर्ण एवं शुद्ध दशा सामान्य वेशन नं० २०१२ | १५७ प्रति नं० ५। पत्र मं० १९७१ लेखनकाल । अपूर्व एवं पशु दशा- जी वेन्टन नं० २०६३ । १४०६ पनि नं० ६ ४५ नहीं है · - ०१६ मा १४ लेखन सं० २०३१ घरम ०२०६४ | सामान्य विशेष संस्कृत टीका सहित है। टीकाकाराने सरस्वती है। टीका का नाम तत्त्वबोधिनी टीका है। १५८० प्रति नं० ७ पत्र ०१६ साइज - १०३४४३ इव । लेखनकाल - ० १७९२ । पूर्ण एवं सामान्य शुद्ध | दशा- सामान्य बेटन नं० २०६५ १५८१ प्रति नं० पत्र मं७१०४ई इन्न। लेखनकाल | पूर्व एवं शुद्ध तिङन्त स्वर प्रकरण तक पूर्ण एवं शुद्ध दशा- उदम ०२०४१ ॥ i विशेष- संस्कृत टीका सहित है। टीकाकार जयकृष्ण है । १४८२ प्रति नं० | ० | साइज - १०x४ च । लेखनकाल x । श्रपूर्ण एवं सामान्य शुद्ध । दश्य सामान्य वेष्ठन सं० २०६७। १४८२ प्रति नं० १० | पत्र सं० २५ | साइज - १०x४ ६ । लेखनकाल | सामान्य शुद्ध । दशा - सामान्य | वेष्टन नं० २०६= | १५ प्रतिनं० ११ पत्र सं० २०५३ साइज-११८] लेखनकाल x पूर्ण एवं सामान्य शुद्ध । दशा- सामान्य वेष्टन नं० २२०१ । १५८५ प्रति नं० १२० १०२ - १०६४६ नकाल x पूर्ण एवं शुद्ध ! दशा- सामान्य | वेष्टन नं० २२०२ । विशेष—प्रति संस्कृत टीका सहित है। टीकाकार ज्ञानेन्द्र सरस्वती है। १५८६ सिद्धान्तका श्री रामचन्द्र पत्र [सं०] १९४३ इन्च भाषा-संस्कृत वि 订 पश
SR No.090393
Book TitleRajasthan ke Jain Shastra Bhandaronki Granth Soochi Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKasturchand Kasliwal
PublisherPrabandh Karini Committee Jaipur
Publication Year
Total Pages446
LanguageHindi
ClassificationCatalogue, Literature, Biography, & Catalogue
File Size11 MB
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