SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 144
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ १२२ विशेष - भक्तामर स्तोत्रमंत्र है। १०२३ गुटका नं० २१६ । पत्र सं० २७ | साइज - x इञ्च । लेखनकाल x | पूर्ण एवं सामान्य शुद्ध । दशा- सामान्य । वेष्टन नं० ३६६ । विशेष उल्लेखनीय संग्रह नहीं है । १०२४ गुटका नं० २१७ सामान्य | वेष्ठन नं० ३६६ | विषय-सूची पंचपरमेष्टी स्तवन विशेष - श्रभयनन्दि कत स्नपनविधि हुई है। ० ३ । साइज - ३x६ इ । लेखनकाल x | पूर्ण एवं शुद्ध । दश १०२५ गुटका नं० २१ पत्र मं० २० साइज - १x६ इस । लेखनकाल x । पूर्ण एवं शुद्ध । दशासामान्य | वेष्टन नं० ३६७॥ विशेष कल्याणमन्दिरस्तोत्र तथा भक्तामर स्तोत्र ऋद्धि मंत्र सहित हैं । १०२६ गुटका नं० २१६ । पत्र सं० १० | साइज - ६ : इव । लेखनश्चल । पूर्ण एवं सामान्य शुद्ध । दशा- सामान्य | वेष्टन नं ० ३६७ । विशेष-पद व स्तुति संग्रह हैं। १०२७ गुटका नं० २२० | पत्र मंत्र १०० | साइज - ८५ इन्च । लेखनकाल x | पूर्ण एवं सामान्य शुद्ध । दशा- जीर्ण । वेष्टन नं० ३६७ । विशेष पूजा संग्रह है। १०२८ गुटका नं० २२१ । पत्र मं० २६६ | साइज - x५ इन्च । लेखनकाले । पूर्ण एवं शुद्ध । दशासामान्य । वेष्टन नं ० ३६८ | ate विचार अंगस्पंद विचार शुभशकुन विचार यात्रा प्रकरण विचार स्वर विचार जिनसहस्रनाम स्तोत्र चक्रेश्वर स्तोत्र ज्वालामालिनी स्तोत्र चिंतामणी पार्श्वनाथ स्तोत्र ऋषिमंडलस्तोत्र कर्ता का नाम श्राशावर गौतम स्वामी 31 "2 25 भाषा ाकत संस्कृत 12 "3 $3 17 37 L "
SR No.090393
Book TitleRajasthan ke Jain Shastra Bhandaronki Granth Soochi Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKasturchand Kasliwal
PublisherPrabandh Karini Committee Jaipur
Publication Year
Total Pages446
LanguageHindi
ClassificationCatalogue, Literature, Biography, & Catalogue
File Size11 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy