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________________ १४ रूपचन्द पंचमंगल एकीमावस्तोत्र बाईसपरीवह भक्तामरस्तोत्र भाषा कल्याणमन्दिरस्तोत्र भाषा विषापहारतोत्र भाषा - - ५ गुटका नं० ७६ । पत्र सं० ८२ , साइजx४ इन्त्र ! लेखनकाल x। अपूर्ण एवं शुद्ध । दशासामान्य ! वेष्टन नं०३२२ । - - - कर्ता का नाम भाषा विषय-सूची चिकित्सा संग्रह सर्वकार्य सिद्धि मंत्र राजवशीकरण मंत्र संस्कृत - ८६ गुटका नं०७७ । पत्र सं० १७० । साइज-५४४ इञ्च | लेखनकाल ४ | पूर्ण एवं सामान्य शुख . दशा-जीर्ण । वेष्टन नं. ३३३ । विशेष-जिनसहस्त्रनामस्तोत्र भाषा एवं सिन्दुर प्रकरण प्रादि पाठों का संग्रह है। ७ गुटका नं. ७६ । पत्र सं० ११६ | साइज-४४ इञ्च । लेखनकाल-सं० १८४५ भादवा सुदी १२ पूर्ण एवं सामान्य शुद्ध [ दशा-सामान्य । बेष्टन नं. ३३। विशेष-स्तोत्रों का संग्रह है। समर गुटका नं०८० पत्र सं०६६ 1 साइज-. x श्च । लखनकाल X| पूर्ण एवं सामान्य शुद्ध । दशा-सामान्य । वेष्टन नं० १३४ । विशेष-कोई उल्लेखनीय सामग्री नहीं है। ६ गुटका नं०८१ । पत्र सं. १४६ । साइज-४ इन्च । लेखनकाल-सं. १६०० ! पूर्ण एवं सामान्य शुद्ध । दशा-सामान्य । वेष्टन नं. १४ । विषय-सूची की का नाम मंगल गीत जिनहर्षसरि रणमोकारस्तवन दानशीलतपमावना संवाद समयसुन्दर इलापुत्र सिझाय सामाछत्तीसी समयसुन्दर स्तवनसंग्रह H NATH -
SR No.090393
Book TitleRajasthan ke Jain Shastra Bhandaronki Granth Soochi Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKasturchand Kasliwal
PublisherPrabandh Karini Committee Jaipur
Publication Year
Total Pages446
LanguageHindi
ClassificationCatalogue, Literature, Biography, & Catalogue
File Size11 MB
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