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________________ *श्री महावीर शास्त्र मंडरर के कय * प्रति न०. नखसा कमाइ इन्न । प्रत्रि पर्ष ०६, संख्या ६, बाइज बञ्च प्रति पूर्ण है। जिन्द्र चवी हुई है। १३ अवयवाहीना। संग्रह ऋता अचान ! भावा संस्था । पृच संसला ३५, माइज इन्न । श्राष्ट्र स्तोत्र का संग्रह है। १४ अष्टशनी। घनिता श्री महाकसक देव । भाषा संस्कन् । नन्न संख्या का साइज १४ । प्रति. नवीन है। १५ अष्ट महम्मी। रम्यनिता अामार्य दिवानकिन्छ । भाषा संस्कृत ! पत्र संडवा ३१६, साइश || प्रती. नवीन है। लिखावट सुन्दर है। प्रजि नं० २. मन्त्र संस्था १७०, साइन ११४ मध । प्रति अपूर्ण है। १६ आगम भाव सिद्ध पूजा। रचयिता भट्टारक श्री भानुकीति । भात्रा संकलन संया २११. साइज ६४४ I लिनि यात्र १८० विपि कला नरेंद्रकीति। ই9াসিন্ধান্ত রূপ। रचयिता श्री गंगामाल मावा हिन्दि सत्र । संख्या १४, साइन्स x इच्च । सम्पूर्ण व सकस २५३. सिधि संवत १८२ लिप्रि स्थान द्रावन । लिपि कला पनि जयचंद्र प्रशस्ति है। १८ अाद्रि पुराय। नम्बग्रिम मा कवि नुदपतु । भाता अपभ्रशं । वा सख्या , साइन ११४५ च । लिबि संवत् १३. सजक साधू मल्छ । लिपि क्रत्तों ने कतुवस्त्रां के ग्रासन काल का अल्ख किया है। मरास्ति दी हुई है। प्रति जीण है। Sन म०२. पत्र संख्या : स्माइन १२॥४४| लिपि संचातू १५८ मिनि का ने बादशाह बावर का नामोल्लेख किया है। प्रति नं० २. पत्रा मारल्या १६. साइन्स न । लिपि संबतू १६१६. प्रशस्ति ड्रैलिपिनमा न जाकार लिनि का श्री भुवन कीति । एक स्यै सन्चर
SR No.090392
Book TitleRajasthan ke Jain Shastra Bhandaronki Granth Soochi Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKasturchand Kasliwal
PublisherRamchandra Khinduka
Publication Year
Total Pages226
LanguageHindi
ClassificationCatalogue, Literature, Biography, & Catalogue
File Size5 MB
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